UP: पूर्व ब्लॉक प्रमुख को 83 मुकदमों के बावजूद हाईकोर्ट से मिली जमानत

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Published By Monis Khan
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शाहजहांपुर, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने थाना तिलहर क्षेत्र से जुड़े मामले में अभियुक्त ददरौल के पूर्व ब्लॉक प्रमुख दिनेश पाल सिंह उर्फ मुन्ना को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा पर रोक लगाकर अपील लंबित रहने तक जमानत मंजूर कर ली। यह आदेश न्यायमूर्ति राज बीर सिंह की अदालत ने पारित किया। 

ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्त को धारा 307-34, 323-34 आईपीसी और 3-25 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए अधिकतम 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी थी। मामले में आरोप था कि होटल पर खाना खाने के बाद पैसे मांगने पर विवाद हुआ और फायरिंग की गई, हालांकि पीड़ित को गोली नहीं लगी और केवल साधारण चोट आई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता रितेश सिंह ने दलील दी कि साक्ष्य विश्वसनीय नहीं हैं और किसी अन्य गवाह ने घटना की पुष्टि नहीं की, जबकि एक प्रमुख गवाह भी अपने बयान से मुकर गया। 

यह भी बताया गया कि अभियुक्त करीब एक वर्ष की हिरासत में रह चुका है और उसकी उम्र 66 वर्ष है तथा वह मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से ग्रसित है। दूसरी ओर राज्य पक्ष ने फायरिंग और 83 मुकदमों के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। न्यायालय ने अभिलेखों का अवलोकन करते हुए पाया कि पीड़ित को गंभीर चोट नहीं लगी और साक्ष्य अपेक्षाकृत कमजोर हैं। 

साथ ही यह भी कहा कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर सजा निलंबन आवेदन खारिज करना उचित नहीं होगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने सजा पर रोक लगाते हुए अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्त दो जमानतदारों के साथ निजी मुचलका दाखिल करेगा, जिसमें एक जमानतदार परिवार का सदस्य होगा। इसके अलावा ट्रायल कोर्ट की ओर से लगाए गए जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि की वसूली पर भी अपील लंबित रहने तक रोक लगा दी गई है।

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