घरेलू चीजें बन सकती हैं जानलेवा: टेडी बियर से लेकर पालतू जानवरों तक से बढ़ता है एलर्जी का खतरा! केजीएमयू एक्सपर्ट की चेतावनी
लखनऊ, अमृत विचार : घर में इस्तेमाल होने वाली कालीन, बच्चों का खिलौना टैडी वियर और पालतू जानवर एलर्जी का बड़ा कारण बन रहे हैं। ऐसी एलर्जी गंभीर रूप धारण कर जानलेवा भी साबित हो सकती है। ये जानकारी केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. सूर्यकांत ने रविवार को इम्यूनो-एलर्जी समिट 2026 में दी।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के कन्वेंशन सेंटर में इम्यूनो-एलर्जी समिट का आयोजन किया गया। इसमें प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि घर में मौजूद धूल, कालीन, टैडी वियर और पालतू जानवर जैसे कुत्ता, बिल्ली, चूहे व खरगोश से एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा छोटे बच्चों में डायपर के इस्तेमाल से भी एलर्जी हो सकती है, जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। छह माह के बाद अन्न प्राशन के दौरान कुछ बच्चों में फूड एलर्जी की समस्या भी देखने को मिलती है, खासकर उन बच्चों में जो संवेदनशील होते हैं या अधिक फास्ट फूड का सेवन करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एलर्जी कई प्रकार की होती है, जिनमें स्किन, फूड, दवा और अन्य एलर्जी शामिल हैं। देश की करीब 25 प्रतिशत आबादी किसी न किसी प्रकार की एलर्जी से प्रभावित है। समय पर इलाज न कराने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
समिट में डॉ. नंदना बाला ने बताया कि एनाफिलेक्सिस एक जानलेवा आपात स्थिति है, जिसमें हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह एक तीव्र एलर्जिक रिएक्शन है, जो दवाओं, मूंगफली, दूध, समुद्री भोजन या कीट के काटने से हो सकता है। इसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत, गले व चेहरे में सूजन, ब्लड प्रेशर का तेजी से गिरना और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लक्षणों में अचानक सांस फूलना, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, होंठ-जीभ-गले में सूजन और चक्कर आना शामिल हैं। ऐसे में तुरंत पहचान और समय पर इलाज ही मरीज की जान बचा सकता है। इसके अलावा डॉ. विकास अग्रवाल एलर्जी का नवीन वर्गीकरण एलर्जी के तंत्र को सरल तरीके से समझाया, डॉ. ज्योति बाजपेयी अस्थमा के बचाव और उपचार के बारे में जानकारी साझा की। डॉ. स्वस्तिका सुविर्या ने एटॉपिक डर्मेटाइटिस, डॉ. कुनाल चंदवार ने अर्टिकेरिया एवं एंजियोएडेमा और डॉ. सुनीला नायक ने एलर्जी मास्टरक्लास (फूड एलर्जी एवं जांच) को सरल भाषा में समझाया।
केजीएमयू में अब हर बुधवार लगेगी एलर्जी ओपीडी
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी विभाग की ओर से मरीजों की सुविधा के लिए एक नई पहल की जा रही है। विभाग के चिकित्सक डॉ. मुकेश कुमार मौर्य ने जानकारी दी कि अप्रैल के प्रथम सप्ताह से प्रत्येक बुधवार को ''एलर्जी ओपीडी'' का संचालन विभाग में किया जाएगा।डॉ. मुकेश मौर्य के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के कारण एलर्जी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। केजीएमयू में कुछ सालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में समर्पित ''एलर्जी ओपीडी'' शुरू करने का उद्देश्य मरीजों को समय पर सही जांच और उपचार उपलब्ध कराना है।यह ओपीडी विभाग में सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलेगी, जिसमें एलर्जी से संबंधित विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल से शहर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
