यूपी में 1.38 लाख HIV मरीजों का उपचार, एआरटी केंद्रों पर निःशुल्क परामर्श और इलाज
लखनऊ। भारत में करीब 25.44 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं, जिनमें लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं और 2.75 प्रतिशत बच्चे शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में करीब 1.38 लाख एचआईवी संक्रमित व्यक्ति एआरटी केंद्रों पर निःशुल्क परामर्श, उपचार और दवा प्राप्त कर रहे हैं।
प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से सोमवार को राज्य सूचना विभाग के सभागार में एचआईवी/एड्स विषय पर राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य एचआईवी/एड्स से जुड़ी सही जानकारी का प्रसार, सामाजिक कलंक को कम करना और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में मीडिया की भूमिका को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने में मीडिया की भूमिका बेहद अहम है और संवेदनशील व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग से समाज में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।
डॉ. संजय सोलंकी ने बताया कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं का समय पर इलाज कर नवजात को संक्रमण से बचाया जा सकता है। प्रदेश में 72 लाख गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक लगभग 62 लाख की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों में 80 प्रतिशत तक कमी लाना है।
इसके तहत प्रदेश में 399 आईसीटीसी केंद्र, 52 एआरटी केंद्र, 115 एसटीआई/आरटीआई क्लीनिक, 102 लक्षित हस्तक्षेप परियोजनाएं और 373 रेड रिबन क्लब संचालित किए जा रहे हैं।
साथ ही हेल्पलाइन 1097 के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यशाला में एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए संक्रमित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
