बिजली विभाग : संविदा कर्मियों की छंटनी और अभियंताओं के निलंबन पर आक्रोश, प्रदेशव्यापी आंदोलन की संघर्ष समिति ने दी चेतावनी

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Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की ओर से लागू की गई वर्टिकल व्यवस्था और हाल में की गई कार्रवाईयों को लेकर उप्र संघर्ष समिति ने बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश होने की बात शनिवार को कही। समिति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हटाए गए संविदा कर्मियों को वापस काम पर नहीं लिया गया और अभियंताओं और कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई वापस नहीं हुई, तो अप्रैल में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। 

समिति का आरोप है कि प्रबंधन निजीकरण की दिशा में मनमाने फैसले ले रहा है। राजधानी सहित एक दर्जन से अधिक शहरों में लागू वर्टिकल व्यवस्था के तहत बिजली आपूर्ति, बिलिंग, मीटरिंग और रखरखाव जैसे कार्य अलग-अलग अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं, जिससे समन्वय और जवाबदेही समाप्त हो गई है। इसका सीधा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा है और गर्मियों में उपभोक्ताओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था ने उपभोक्ताओं की समस्याएं और बढ़ा दी हैं। कई मामलों में भुगतान के बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो रही है, जबकि सिंगल विंडो सिस्टम समाप्त होने से लोग भटकने को मजबूर हैं। आरोप है कि प्रबंधन अपनी विफलताओं का ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ रहा है। बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी, नियमित पदों में कटौती और टीजी-2 कर्मचारियों को हटाने से असंतोष बढ़ा है। अलीगढ़ में एक मुख्य अभियंता के निलंबन से भी रोष गहरा गया है। केस्को में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर प्रबंधन को चेतावनी दी, जबकि पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगमों के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन 486वें दिन भी जारी रहा।

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