PCS-2024: यूपी की परीक्षा प्रणाली बनी राष्ट्रीय भरोसे का प्रतीक, योगी मॉडल से पारदर्शी-मेरिट चयन को मजबूती
लखनऊ, अमृत विचार: उप्र. लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस-2024 परीक्षा का परिणाम प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संकेत बनकर उभरा है। इस बार चयन सूची में यूपी के साथ 10 अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों की सफलता ने साबित किया है कि यूपी की परीक्षा प्रणाली अब राष्ट्रीय स्तर पर भरोसे का प्रतीक बन चुकी है।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यूपी मॉडल ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को नई पहचान दी है। योग्यता आधारित चयन और तकनीकी निगरानी के चलते अब यूपी की परीक्षाएं देशभर के अभ्यर्थियों के लिए विश्वसनीय मंच बन गई हैं। इस बार कुल 932 चयनित अभ्यर्थियों में 864 (92.7%) उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि 68 (7.3%) अभ्यर्थी अन्य राज्यों से सफल हुए हैं।
सभी राज्यों को समान अवसर
राज्यवार आंकड़ों में मध्य प्रदेश से 20, हरियाणा से 18, बिहार से 12 और दिल्ली से 9 अभ्यर्थियों की सफलता दर्ज हुई है। यह दर्शाता है कि प्रदेश की परीक्षा प्रणाली में सभी को समान अवसर मिल रहा है और बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी भी बराबरी से प्रतिस्पर्धा कर सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
हर जिले से उभर रही प्रतिभा
जिला-वार विश्लेषण में 75 में से 74 जिलों के अभ्यर्थियों का चयन होना इस बात का प्रमाण है कि अब प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर नगर, आगरा और अयोध्या जैसे जिलों के साथ संभल, कन्नौज, कासगंज, महोबा और फतेहगढ़ जैसे छोटे जनपदों से भी अभ्यर्थियों की सफलता समावेशी विकास को दर्शाती है।
संतुलित सामाजिक प्रतिनिधित्व
वर्गवार चयन में सामान्य वर्ग से 357, ओबीसी से 270, एससी से 186, ईडब्ल्यूएस से 97 और एसटी से 22 अभ्यर्थियों की सफलता संतुलित सामाजिक प्रतिनिधित्व को दिखाती है। टॉप 20 में ओबीसी वर्ग के 8 अभ्यर्थियों की मौजूदगी समान अवसर का मजबूत संकेत है। वहीं टॉप-5 में 80% महिला अभ्यर्थियों की सफलता महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत है।
अभ्युदय योजना का असर, 43 अभ्यर्थी सफल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अभ्युदय कोचिंग योजना का प्रभाव भी इस परिणाम में स्पष्ट दिखा। इस योजना से जुड़े 43 अभ्यर्थियों ने पीसीएस-2024 में सफलता हासिल की है। निःशुल्क कोचिंग, मेंटरशिप और बेहतर मार्गदर्शन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। यह परिणाम योगी मॉडल की उस सोच को मजबूत करता है, जिसमें हर प्रतिभा को समान अवसर देने पर जोर है।
