भदोही : हार्मुज बंद होने से लाखों बुनकरों की रोजी-रोटी का संकट, कालीन हस्त परक उद्योग पर असर;एक्सपोर्ट प्रभावित
भदोही। पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण हार्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से कालीन जैसे हस्त परक उद्योग से जुड़े लाखों बुनकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने शुक्रवार को यहां बताया कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कैंसर की तरह प्रभाव डाल रहा है।
हार्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से परिवहन शुक्ल कई गुना बढ़ने से कालीनों के उत्पादन कास्ट पर विपरीत असर देखा जा रहा है। रास्ता अवरूद्ध होने से न्यूजीलैंड जैसे देशों से कालीन निर्माण में प्रयुक्त होने वाले ऊल की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि अमेरिका भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा आयातक देश है, जहां भारतीय कालीनों के सकल उत्पाद का 50 से 60 फीसद अकेले अमेरिका को होता रहा है।
युद्ध के कारण अमेरिका में जबरदस्त मंदी का असर पड़ने की बातें मीडिया की सुर्ख़ियों में हैं जिससे वहां के लोग भी अब विलासिता से जुड़े कालीन की खरीदारी के बजाय अपने घरेलू उपयोग की दैनिक वस्तुओं को प्रथमिकता दे रहे हैं।
इसका सीधा असर कालीनों के निर्यात पर पड़ रहा है। तमाम विडंबनाओं के बीच 30 से 40 फीसद कालीन या तो रास्ते में डंप हो गया है या फिर बंदरगाहों के गोदामों की शोभा बढ़ा रहा है। इसी तरह स्वीटजरलैंड, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी सहित अन्य खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात पर भी व्यापक असर पड़ा है।
