स्वर्णिम विजय मशाल से गौरवान्वित हुई बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी
अमृत विचार, बरेली। भारत-पाक युद्ध की स्वर्णिम वर्षगांठ पर दिल्ली से देश के कोने-कोने में भेजी जा रही स्वर्णिम विजय मशाल से बुधवार को बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी गौरवान्वित हुई। सेना की ओर से वीर सैनिकों की विजय गाथा को बयां करने के साथ ही शस्त्रों एवं अन्य उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई। साथ ही युद्ध के …
अमृत विचार, बरेली। भारत-पाक युद्ध की स्वर्णिम वर्षगांठ पर दिल्ली से देश के कोने-कोने में भेजी जा रही स्वर्णिम विजय मशाल से बुधवार को बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी गौरवान्वित हुई। सेना की ओर से वीर सैनिकों की विजय गाथा को बयां करने के साथ ही शस्त्रों एवं अन्य उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई। साथ ही युद्ध के विजेता सैनिकों और शहीदों की वीर नारियों को सम्मानित किया गया।
भारत-पाक के बीच वर्ष 1971 में हुए युद्ध की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में निकाली जा रही स्वर्णिम विजय मशाल बुधवार को बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में पहुंची। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाक को हराकर सैनिकों ने भारत की विजय पताका फहराई थी। इसी युद्ध के बाद दुनिया के मानचित्र पर बांग्लादेश का उदय हुआ था। विश्व युद्ध के बाद यह दूसरा ऐसा मौका था जब इतने सैनिकों के साथ किसी देश के सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। यह घाव आज भी पाकिस्तान को सालता है। भारतीय सेना के इस पराक्रम को 50 साल पूरे हो चुके हैं।

16 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय दिवस के जश्न के मौके पर दिल्ली में स्वर्णिम विजय मशाल की लौ जलाई थी जहां से यह चार मशाल 1971 युद्ध के विजेताओं के क्षेत्रों के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में घूम रही हैं। पूर्वी क्षेत्र के लिए निकाली गई यह स्वर्णिम विजय मशाल दिल्ली से बाबूगढ़ होते हुए बरेली में 19 दिसंबर को आई थी जो 29 दिसंबर को यहां से रवाना होगी। इस स्वर्णिम विजय मशाल को आमजन के बीच में ले जाया जा रहा है जिससे वे अपने देश के वीर सैनिकों की वीरता पर गौरवान्वित हो सकें।
इसी क्रम में बुधवार को स्वर्णिम विजय मशाल बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी पहुंची। वहां बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डा. केशव अग्रवाल ने कर्नल कार्की, सेवानिवृत्त वॉर वेटर्न ऑफ बैटल ऑफ बसंत कर्नल वीरआर मिश्रा, सेवानिवृत्त फ्लाइंग ऑफिसर एनके कांडपाल का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। प्रति कुलाधिपति डा. अशोक अग्रवाल ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। वीर नारी रमा देवी पत्नी शहीद नायक गोखरन लाल और सुद्धमा देवी पत्नी शहीद सिपाही जंगी सिंह को वाइस चांसलर डा. लता अग्रवाल और प्रो वाइस चांसलर डा. किरन अग्रवाल ने सम्मानित किया।
इस मौके पर कुलाधिपति डा. केशव अग्रवाल ने संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना की जीत का 50वीं वर्षगांठ का जश्न मनाना बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के लिए गौरव की बात है। यह गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि आज हमारे बीच यहां बहुत से ऐसे लोग हैं जिनका जन्म वर्ष 1971 के बाद हुआ है।
आज हम उसी ऐतिहासिक युद्ध के विजय दिवस पर यहां एकत्रित हुए हैं। 1962 तक भारतीय सेना के पास हथियारों से लेकर अन्य जरूरी सामानों तक की कमी थी लेकिन फिर भी जवानों ने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि 1965 युद्ध के आसपास की बात की जाए तो उस समय बरेली में दहशत का माहौल हुआ करता था। मोहल्ले में लोग खड़े होकर आसमान में देखते थे कि कैसे फाइटर प्लेन वार कर रहे हैं। ब्लैक आउट हुआ करता था, सायरन बजता था। सायरन बजते ही सतर्क हो जाते थे कि पता नहीं कहां से कोई बम गिरा दे, इसलिये उस समय सायरन का भी डर रहता था।

पांच मिनट से कम अंतराल पर दुश्मन के ठिकाने पर दागे गोले
बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में बुधवार को वर्ष 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध की 50वीं वर्षगांठ का जश्न मनाया गया। इस दौरान भारतीय सेना की ओर से एक प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें सेना के उपकरणों से लेकर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने वाले घातक हथियार भी मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान युद्ध के दौरान तोप को उस स्थान तक पहुंचाने और उसे असेंबल कर दुश्मन पर निशाना साधने का जब वीर सैनिकों ने प्रदर्शन किया तो पूरा परिसर भारत माता के जयकारों से गूंज उठा। छात्र-छात्राएं देश के असली हीरो के साथ सेल्फी लेते हुए और उनसे हथियारों आदि की जानकारी भी लेते नजर आए। जाट रेजीमेंट के फाइव बैंड ने जब अपनी धुन पर परेड की तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस ऐतिहासिक क्षण को युवा मोबाइल में कैद करते नजर आए। आसमान से हेलिकॉप्टर से सुरक्षा के लिहाज से कड़ी नजर रखी जा रही थी तो दूसरी ओर ड्रोन से पूरे कार्यक्रम की रिकार्डिंग दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
सिर पर टोपी और कंधे पर रायफल रखकर सैनिक बने छात्र-छात्राएं
भारतीय सेना की वीरगाथा का वर्णन और उसके उपकरण व हथियारों की प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण काा केंद्र रही। इनमें सबसे अधिक युवाओं की भीड़ सेना के उस शिविर पर रही जहां एक काल्पनिक अस्थाई चौकी पर सेना की रायफल और टोपी रखी हुई थी। युवाओं में सैनिकों के प्रति क्रेज को देखते हुए सेल्फी प्वाइंट बनाया गया जहां युवा हाथ में रायफल पकड़ कर और सिर पर टोपी लगाकर फोटो खिंचवाते या सेल्फी लेते नजर आए।
युद्ध के समय मौके पर ही जवान का होता है ऑपरेशन
युद्ध के समय घायल जवान का उपचार मौके पर ही किया जाता है। इसके लिए युद्ध स्थल पर ही स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाते हैं। प्रदर्शनी में इसका भी प्रदर्शन भारतीय सेना की ओर की ओर से किया गया। जहां इमरजेंसी वार्ड से लेकर एंबुलेंस, जांच और ऑपरेशन तक की सुविधा रहती है। जवानों ने छात्र-छात्राओं को प्रत्येक शिविर की जानकारी दी।
पैदल सैनिक की छोटी तोप से लेकर पिस्तौल तक रही आकर्षण का केंद्र
सेना की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में घातक हथियारों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। यहां पैदल सैनिक के पास मौजूद छोटी तोप भी मौजूद थी तो 15 मीटर तक मारक क्षमता वाली पिस्तौल भी थी। जवान लोगों को हर हथियार की खूबी और उसके उपयोग आदि की जानकारी देते नजर आए।

स्वर्णिम विजय मशाल के साथ खिंचवाए फोटो
देश के विभिन्न क्षेत्रों से घूमकर 19 दिसंबर को बरेली में आई स्वर्णिम विजय मशाल बुधवार को बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रांगण में मौजूद थी। वहां मौजूद हर शख्स इस मशाल के साथ सेल्फी या फोटो खिंचवाने को उत्साहित नजर आया। बड़ी संख्या में लोगों ने स्वर्णिम विजय मशाल के साथ फोटो क्लिक की।
