ऐतिहासिक क्षण : प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग अवशेष के दर्शन कर भक्ति विभोर हुई नाथ नगरी

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार की ओर से नाथ नगरी के त्रिवटी नाथ मंदिर में मंगलवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। एक हजार वर्ष प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेष पहुंचें तो श्रद्धाभाव से लोगों ने उनके दर्शन किए। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर के मार्गदर्शन में इन पावन अवशेषों को देशभर में दर्शन के लिए ले जाया जा रहा है। 

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बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम से स्वामी भव्य तेज करीब 9:45 बजे अवशेष लेकर मंदिर पहुंचे। गेट पर नाथ नगरी समिति के पदाधिकारियों ने ढ़ोल नागाड़ों के साथ सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के अवशेष का स्वागत किया। करीब 10 बजे अभिषेक पूजन का कार्यक्रम शुरू हुआ जो एक घंटे तक चला। आर्ट ऑफ लिविंग के गुरू स्वामी भव्य तेज ने मंच पर मौजूद महंतों का सम्मान किया फिर मंदिर के दर्शन किए। इस बीच लोगों की उत्सुकता पावन अवशेष को देखने के लिए बढ़ती जा रही थी। मंदिर के हॉल में आयोजित पूजन स्थल पर स्वामी भव्य तेज ने पूजन थाल में अवशेष निकाल कर रखें तो लोगों ने पूरे श्रद्धा भाव से उनके दर्शन किए। अवशेष के दर्शन को लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही थी। इस मौके पर आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े पार्थो कुनार भी व्यवस्था देखने में लगे रहे। इस दौरान मनीष शर्मा, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, संजीव औतार अग्रवाल, संचित अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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वीडीएस कोआर्डिनेटर श्वेता कुनार ने बताया कि नाथ नगरी एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना का साक्षी बना है। पूरे देश की यात्रा के अंतर्गत श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेष जो 100 वर्षों तक तमिलनाडु में गुप्त रूप से संरक्षित रहे, इस पावन नगरी में श्रद्धालुओं ने इनके दर्शन किए। उन्होंने कहा कि यह यात्रा 1000 वर्षों की तपस्या, भक्ति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है, जो लंबे समय से भारतीय आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने का कार्य आर्ट ऑफ लिविंग संस्था कर रही है। जिसका मूल मंत्र है तनाव मुक्त मन, हिंसा मुक्त समाज। यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। 1000 वर्ष प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेषों को लेकर यात्रा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु से होते हुए प्रदेश में झांसी, कानपुर, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद होते हुए 6 अप्रैल को बरेली पहुंची है।

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गजनवी ने मंदिर को किया था ध्वस्त, 900 वर्षों तक सुरक्षित रखकर हुई पूजा
वीडीएस कोआर्डिनेटर बरेली गोपाल भारण अग्रवाल ने कहा कि इतिहास के अनुसार वर्ष 1026 ईसवीं में आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। लेकिन, आस्था की ज्योति निरंतर प्रज्वलित रही। पवित्र शिवलिंग के अवशेषों को अग्निहोत्री पुजारियों ने 900 वर्षों तक गुप्त रूप से सुरक्षित रखकर पूजा-अर्चना की, जो पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित होते रहे। सन् 1925 में कांची के शंकराचार्य ने भविष्यवाणी की कि इन अवशेषों को उचित समय पर ऐसे योग्य आध्यात्मिक नेतृत्व को सौंपा जाए। जिनके नाम में शंकर हो। जनवरी 2025 में परंपरा के अंतिम संरक्षक सीताराम शास्त्री ने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ये अवशेष गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर को सौंपे थे।

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