गोरखपुर में CM योगी : दिग्विजयनाथ कॉलेज में कंप्यूटर रिसर्च सेंटर का किया शुभारंभ, कहा- शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर स्थित दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में आधुनिक कंप्यूटर प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह लैब कॉलेज के पूर्व शिक्षक डॉ. तेज प्रताप शाही की स्मृति में उनके परिवार द्वारा स्थापित की गई है। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कंप्यूटर लैब इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने डॉ. शाही को याद करते हुए कहा कि यह पहल उनकी स्मृतियों को जीवंत रखने का सराहनीय प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने डॉ. तेज प्रताप शाही के पुत्रों अनन्य शाही और अतिरेक शाही को इस कार्य के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने डॉ. शाही के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए उनकी गोरक्षपीठ के प्रति निष्ठा और समर्पण को याद किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक ऋषि त्रिपाठी समेत कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पत्रकारिता के अलग-अलग आयामों में समन्वय आवश्यक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि पत्रकारिता के अलग.अलग आयामों प्रिंट मीडिया, विजुअल मीडिया, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होने कहा कि यदि किसी एक ही तथ्य को मीडिया के अलग.अलग आयाम भिन्न.भिन्न तरीके और दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे तो आमजनमानस के सामने भ्रम की स्थिति होगी। ऐसी स्थिति मीडिया के प्रति जनविश्वास को भी प्रभावित करेगी।
इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया के सभी अंग समान मानक, मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ें। उन्होने कहा कि आज पत्रकारिता में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां हैं। पत्रकारिता में प्रिंट मीडिया, विजुअल मीडिया, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के स्वरूप हैं। आज परिवारों में प्रत्येक सदस्य का रूझान मीडिया के अलग अलग रूपों में रहता है। आज पत्रकारिता के सभी रूपों को समग्रता के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। प्रिंट मीडिया, विजुअल मीडिया के अपने कुछ मानक हैं, अपनी आचार संहिता है पर सोशल मीडिया को अभी इससे जोड़ना है।
योगी ने कहा कि पत्रकारिता को स्वयं को बेलगाम नहीं होने देना है बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों व आर्दशों के साथ आगे बढ़ाना है। भारत में 200 वर्ष के पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा व एक भारत श्रेष्ठ भारत का भाव रहा है। हमें इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मीडिया में एक ऐसा भी वर्ग है जो समाज को गुमराह करके अशांति फैलाने का कार्य करता है।
हमें मीडिया के ऐसे रूप से बचने आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में एक ही खबर में भिन्नता होती है तो वह जनमानस को विचलित करती है। यह दुविधा की स्थिति खतरनाक होती है। हमें ऐसी स्थिति नहीं हो ऐसा प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार मूल्यों व आर्दशों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है। उन्होने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है। संवाद में आलोचना हो सकती है मगर इस आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मनाना चाहिए। जब हम एक सूत्र की मनोस्थिति से कार्य करते हैं तो सदैव सार्थक परिणाम सामने आते हैं।
पत्रकारिता समाज का आईना होता है। पत्रकारिता जिस दृष्टि से समाज के मुद्दो को प्रस्तुत करता हैए समाज उसी दृष्टि से उसे समझता है। पत्रकारिता को जन विश्वास प्रतीक के रूप में बने रहने के लिए सही और गलत के प्रति एक भाव में रहना चाहिए। पत्रकारिता में किसी भी मुद्दे पर दो भाव नहीं होने चाहिए क्योंकि यह भाव जन विश्वास पर कुठाराघात करता है।
