बरेली: विवि ने नहीं लिया निर्णय, प्राइवेट फार्म को लेकर छात्र परेशान

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बरेली,अमृत विचार। परीक्षा के प्राइवेट फार्म भरकर शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा वे छात्र परेशान हैं जिन्होंने स्नातक या परास्नातक के प्रथम वर्ष की परीक्षा पास कर ली है। अपनी परेशानी को लेकर छात्र विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक के पास पूछताछ के लिए पहुंच रहे हैं। राज्यपाल के …

बरेली,अमृत विचार। परीक्षा के प्राइवेट फार्म भरकर शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा वे छात्र परेशान हैं जिन्होंने स्नातक या परास्नातक के प्रथम वर्ष की परीक्षा पास कर ली है। अपनी परेशानी को लेकर छात्र विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक के पास पूछताछ के लिए पहुंच रहे हैं। राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी की ओर से जारी पत्र पर अभी तक विश्वविद्यालय की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है जबकि पत्र 15 दिन पहले भेजा गया था।

8 दिसंबर को राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी केयूर सी संपत ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालय के कुलपति को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में लिखा था कि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में व्यक्तिगत शिक्षार्थी के रूप में प्रचलित शैक्षिक व्यवस्था को प्रतिबंधित करने का अनुरोध किया था। प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे।

छात्र बुधवार को विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार से मिला। परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि अभी व्यक्तिगत फार्म भरने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। छात्र ने बताया कि उसे द्वितीय वर्ष का फार्म भरना है। इस पर परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि यदि कोई बदलाव होगा तो नए सत्र से होगा। एक अन्य बीए के छात्र ने भी इसी तरह की समस्या रखी। जब से छात्रों को इस निर्देश की जानकारी मिली है तब से वे परेशान हो रहे हैं।

दस दिन पहले आया था राज्यपाल कार्यालय से पत्र
राज्यपाल कार्यालय से आए पत्र को करीब 10 दिन बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों ने देखा तो खलबली मच गई। कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक ने पत्र पढ़ा लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया। कुछ दिनों बाद विश्वविद्यालय में शीतकालीन अवकाश होने वाला है। इससे साफ है कि अभी जल्द कोई निर्णय नहीं होने वाला है। मौजूदा समय में विश्वविद्यालय में काफी सीटें खाली रह जाती हैं। कुछ छात्र नौकरी करने के साथ-साथ आगे की शिक्षा प्राइवेट फार्म भरकर ही हासिल करते हैं। विश्वविद्यालय में प्रत्येक वर्ष परेशान होने लगे एक से डेढ़ लाख लोग व्यक्तिगत फार्म भरकर परीक्षा देते हैं।

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