यूपी में स्कूली वाहन निरीक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल, टेक्निकल जांच में बाबुओं पर बढ़ा बोझ
लखनऊ, अमृत विचार : स्कूली वाहनों की तकनीकी जांच और उनके विवरण को पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी इन दिनों परिवहन विभाग के बाबुओं पर आ गई है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी के चलते यह अहम कार्य गैर-तकनीकी स्टाफ से कराया जा रहा है। जानकारी के अनुसार करीब 30 बाबुओं की ड्यूटी पोर्टल पर स्कूलों और वाहनों का विवरण अपलोड करने में लगाई गई है।
कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में जाकर वाहनों की जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करें। इस दबाव में कर्मचारी रोजाना 12 घंटे से अधिक काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक केवल आधे स्कूलों का डेटा ही अपलोड हो सका है।
बाबुओं का कहना है कि उन्हें न तो पोर्टल संचालन की पूरी जानकारी है और न ही वाहनों की तकनीकी समझ, फिर भी उनसे यह कार्य कराया जा रहा है। जानकारी के अभाव में एक-एक विवरण भरने में अधिक समय लग रहा है, जिससे काम की गति धीमी बनी हुई है।
इसका सीधा असर आरटीओ कार्यालय के नियमित कामकाज पर भी पड़ रहा है। बाबुओं की फील्ड ड्यूटी के चलते कार्यालय में आने वाले आवेदकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और कई जरूरी कार्य लंबित हो रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और बिगड़ सकती है। स्कूलों की ओर से भी समय पर पूरा सहयोग मिले तो कार्य जल्दी पूरा हो सकता है। अधिकारी और कर्मचारी लगातार स्कूलों की जांच कर रहे हैं।-प्रदीप कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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