Jalaun News : हर-घर-जल योजना में अनियमितताओं का आरोप, किसानों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में संचालित जल जीवन मिशन एवं 'हर घर जल योजना' के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भाकियू के जिला प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन जिले के अधिकांश गांवों में आज भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि संबंधित कार्यदायी संस्था को कार्य पूर्ण करने के लिए तीन से चार बार समयवृद्धि दी जा चुकी है, इसके बावजूद परियोजना अब तक अधूरी है।
आरोप है कि पिछले लगभग एक वर्ष से अधिकांश स्थानों पर कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है।कंपनी ने केवल 40 से 50 गांवों में जलापूर्ति शुरू की है, लेकिन वहां भी सभी घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा। कई गांवों में केवल 15 से 20 प्रतिशत घरों में ही जल कनेक्शन सक्रिय बताए गए हैं। भाकियू नेता ने कहा कि इससे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट 'हर घर जल योजना' प्रभावित हो रही है और सरकार की छवि धूमिल हो रही है।
उन्होंने जिला प्रशासन, जल निगम ग्रामीण और थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (टीपीआई) एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत बोरवेल, पंप हाउस, स्टाफ क्वार्टर, बाउंड्रीवाल, ओवरहेड टैंक, आरओ प्लांट, पाइपलाइन बिछाने, क्लोरीनेशन प्लांट तथा घर-घर जल कनेक्शन जैसे कार्य प्रस्तावित थे, लेकिन पांच वर्षों में केवल बोरवेल ड्रिलिंग, कुछ स्थानों पर सबमर्सिबल पंप स्थापना, बाउंड्रीवाल निर्माण और लगभग 80 प्रतिशत पाइपलाइन बिछाने का कार्य ही हुआ है, जबकि भुगतान लगभग पूरा कर दिया गया।
दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि कई बोरवेलों की वास्तविक गहराई 75 से 90 मीटर होने के बावजूद अभिलेखों में 100 मीटर दर्शाकर भुगतान लिया गया। उन्होंने कहा कि कई स्टाफ क्वार्टरों में रसोई, शौचालय, विद्युत व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
ओवरहेड टैंकों के निर्माण में भी तकनीकी मानकों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान जिन सड़कों को खोदा गया था, उन्हें अब तक पूर्व स्थिति में नहीं लाया गया है। कई ग्रामीण मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।
आरोप है कि सड़क मरम्मत और पुनर्स्थापन का भुगतान कागजों में दिखाकर निकाल लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य नहीं हुआ। भाकियू ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा कर ग्रामीणों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
