पुस्तक समीक्षा : मानवीयता की पक्षधर लघुकथाएं
युवा साहित्यकार अतुल मिश्र की पहली कृति ‘लज्जाबोध’ लघुकथा संग्रह के रूप में हाल ही में प्रकाशित हुई है। अपने तेवर, उद्देश्यपरकता और प्रभावोत्पादकता के कारण इनमें से कई को सहज ही श्रेष्ठ लघुकथाओं की श्रेणी में रखा जा सकता है। संग्रह में कुल बीस लघुकथाएं हैं।
पहली लघुकथा ‘जीवन प्रमाण’ से ही लेखक के सामाजिक सरोकारों का आभास हो जाता है। लघुकथा में दो स्थितियां हैं। एक पशु से संबंधित है, तो दूसरी मनुष्य से। दोनों ही स्थितियों में आश्चर्यजनक समानता है। स्वार्थी इंसान के लिए पशु और मनुष्य में कोई अंतर नहीं है। दोनों ही उसके लिए समान रूप से केवल ‘आय’ का साधन हैं। छोटी खुशी शक्तिशाली व्यक्ति के अन्याय के खिलाफ दुर्बल व्यक्ति द्वारा किए गए प्रतिरोध से उसके मन में उत्पन्न आनंद की अभिव्यक्ति है। ‘सत्संग’ में समाज में व्याप्त अंधविश्वासों का चित्रण है।
लघुकथा के शिल्प के प्रति लेखक की सजगता प्रशंसनीय है। कथानक की बुनावट प्रभावशाली है। विशेषकर, संवाद लघुकथा की विश्वसनीयता में वृद्धि करते हैं। संग्रह की कुछ कहानियां कमजोर हैं। संग्रह की लघुकथाएं वर्तमान की घटनाओं से प्रेरित हैं, इसीलिए इनमें तेजी से बदलते आज के जीवन मूल्य अंकित हैं। इनमें व्यवस्थागत विद्रूपताओं सहित युगीन यथार्थ के चित्रण में एक बेहतर समाज के निर्माण का संदेश अंतर्निहित है। यह संग्रह साहित्य के क्षेत्र में अतुल मिश्र के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
पुस्तक : लज्जाबोध (लघुकथा संग्रह)
लेखक : अतुल मिश्र
प्रकाशक : आईसेक्ट पब्लिकेशन, भोपाल
वर्ष : 2025
समीक्षक : रणजीत पांचाले, बरेली
जीवन का प्रबंधन सिखाती कृति
आलेख किसी भी विषय पर तर्कसंगत तथ्यात्मक वर्णन होता है, जिसमें लेखक स्वयं के गहन अध्ययन एवं बुद्धिमता से अपने विचारों, तर्कों और अनुभवों को व्यवस्थित एवं सुसंगत ढंग से लिखते हैं। इस किताब में लेखक ने अपने अनुभव, अनुसंधान एवं तर्क द्वारा मनुष्य जीवन की कठिनाइयों, उपेक्षाओं एवं विफलताओं की सभी पहलुओं का उजागर किया है, साथ ही आत्मसंयम, आत्मविश्वास एवं आत्म प्रबंधन द्वारा इन चुनौतियों से जीतने का व्यावहारिक मार्ग भी प्रशस्त किया हैं। इस पुस्तक का प्रत्येक लेख पाठक के हृदय तक पहुंचता है और मन-मस्तिष्क को विचार करने को विवश करता है।
इसी तरह लेखक नृपेन्द्र अभिषेक नृप अपने संग्रह में कई चुने हुए निबंधों के माध्यम से पाठकों को बताया है कि बिना आत्म-प्रबंधन के बाहरी सफलता अधूरी और क्षणिक होती है। प्रत्येक लेख सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और विषयों की गहनता पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है। पुस्तक की भाषा सरल, सहज और बोलचाल की है, जिससे आम पाठक आसानी से जुड़ जाता है। लेखक ने रोजमर्रा के अनुभवों और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए गहरी बातों को सरल बना दिया है। यह कृति एक अलग प्रेरक साहित्य है। इस संग्रह के लेख केवल पढ़ने को ही नहीं, बल्कि पाठकों को अपने जीवन में आत्मसात करने को विवश करेंगे। लेखक का दृष्टिकोण दार्शनिक गहराई के साथ-साथ व्यावहारिक भी है।
पुस्तक: आत्म प्रबंधन सफलता की सीढ़ी
लेखक: नृपेन्द्र अभिषेक “नृप”
प्रकाशन: समृद्धि पब्लिकेशन, दिल्ली
मूल्य: ₹ 225 रुपये
समीक्षक: अंबिका कुशवाहा ‘अम्बी’
