इटावा में अवैध मजार चलेगा बुलडोजर, अदालत ने जारी किया ध्वस्तीकरण का आदेश

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Published By Deepak Mishra
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इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले स्थित फिशर वन क्षेत्र में अवैध मजार को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। जिला वन अधिकारी (डीएफओ) की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद मजार को आरक्षित वन भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली एवं ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत करीब 64 दिनों तक चली सुनवाई के बाद प्राधिकृत अधिकारी एवं जिला वन अधिकारी विकास नायक ने यह आदेश पारित किया। 

आदेश में कहा गया है कि संबंधित भूमि वर्ष 1916, 1939 और 1946 के गजट अभिलेखों के अनुसार वन विभाग की आरक्षित भूमि है। निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि आरक्षित वन भूमि पर भारत सरकार की सक्षम समिति की पूर्व अनुमति के बिना किसी प्रकार का गैर-वानिकी कार्य नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर निर्माण को अवैध मानते हुए कब्जा बेदखली का आदेश दिया गया है। 

सुनवाई के दौरान मजार पक्ष के प्रतिनिधि फजले इलाही सहित अन्य पक्षकारों को कई अवसर दिए गए, मगर वे भूमि स्वामित्व अथवा निर्माण की वैधता से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। पक्षकारों ने मजार को सैकड़ों वर्ष पुराना बताया, लेकिन उसके समर्थन में कोई प्रमाण न्यायालय के समक्ष नहीं रखा गया। 

वन विभाग के अनुसार 23 जनवरी को रेंजर अशोक कुमार शर्मा द्वारा इस संबंध में वाद दायर किया गया था, जिसके बाद नोटिस जारी कर सुनवाई प्रारंभ की गई। कई तिथियों पर समय दिए जाने के बावजूद स्वामित्व संबंधी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए जा सके। अधिकारियों ने बताया कि ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश की सूचना जिला प्रशासन और पुलिस को दे दी गई है। 

प्रशासनिक और पुलिस सहयोग से आगे की कार्रवाई किसी भी समय की जा सकती है। वन विभाग ने पहले ही मजार तक जाने वाले मार्ग पर प्रतिबंधात्मक बोर्ड लगाकर आवाजाही रोक दी थी। रास्ते पर कटान और बैरिकेडिंग भी की गई है, ताकि संरक्षित वन क्षेत्र में अनधिकृत गतिविधियां न हों। प्रशासन ने कहा है कि संरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या निर्माण कानूनन प्रतिबंधित है और ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

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