1180 बोरी पीओपी हड़पने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की मदद से 72 घंटे में हुआ खुलासा

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Published By Muskan Dixit
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चालक को गुमराह कर ट्रक पर लदी बाेरियां उतरवाई

गोसाईंगंज, अमृत विचार: फर्म का मालिक बनकर पंजाब से आए ट्रक चालक को गुमराह कर 1180 बोरी पीओपी की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का गोसाईंगंज पुलिस ने 72 घंटों के अंदर भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर हड़पा गया माल, घटना में प्रयुक्त दो बाइक व चार मोबाइल बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया है।

डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद ने बताया कि मनसा पंजाब निवासी ट्रक चालक बलराज सिंह 4 अप्रैल को दन्तौर राजस्थान से ट्रक में पीओपी बोरियां लादकर बाराबंकी शाह ट्रेडर्स आ रहा था। गोसाईंगंज क्षेत्र में पहुंचने पर ट्रक चालक को एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन करके बताया गया कि तुम जो माल लेकर बाराबंकी जा रहे हो मैं उस फर्म का मालिक बोल रहा हूं, उस माल को गोसाईंगंज में ही उतारना है। मैं अपना मुंशी भेज रहा हूं।

उसके ट्रक ड्राइवर को दूसरे नंबर से फोन किया गया जिसमे कहा गया कि मालिक से तुम्हारी बात हुई है मैं माल उतरवाने आ रहा हूं। कुछ समय बाद ही तीन लोग डाला व ट्रैक्टर ट्राली लेकर ट्रक ड्राइवर के पास आये और माल उतरवाकर कबीरपुर में किराये के कमरे में रखवा दिया हैं। भाड़े हेतु माल भेजने वाली कम्पनी द्वारा बाराबंकी स्थित फर्म से सम्पर्क किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि माल अभी तक पहुंचा ही नहीं है। तब ट्रक चालक को धोखाधड़ी होने का पता चला। जिसपर उसने 14 अप्रैल को गोसाईंगंज थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करायी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशिक्षु आईपीएस सारिका चौधरी व इंस्पेक्टर गोसाईंगंज दिलेश कुमार सिंह ने जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच की। अहम जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम ने 17 अप्रैल को बेली गांव के पास स्थित पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के अंडरपास के नीचे से तीन आरोपियों को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम तौफीक आलम, राजबाबू व गुलाम गौस निवासी हरिहरपुर तम्कुहीराज कुशीनगर बताया। इंस्पेक्टर दिलेश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों का आपराधिक इतिहास पता किया जा रहा है।

जीएसटी अफसर बन फंसाते थे आरोपी

प्रशिक्षु आईपीएस सारिका चौधरी ने बताया कि आरोपी ट्रक पर लिखे नंबर से ट्रक मालिक को फोन कर ड्राइवर का नंबर लेते हैं। उसके बाद खुद को फर्म का मालिक बताकर ड्राइवर को गुमराह कर माल उतरवा लेते थे। यही नहीं आरोपी जीएसटी का अफसर बन भी धोखाधड़ी करते थे। बरामद माल की कीमत करीब चार लाख है।

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