मुरादाबाद: नेत्र चिकित्सालय कोरोना से लापरवाह, नहीं है हेल्पडेस्क-सेनिटाइजर की व्यवस्था
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना महामारी के बीच जो भारत सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी, जिला नेत्र चिकित्सालय उसका कतई पालन नहीं कर रहा है। इस अस्पताल में न ही हेल्प डेस्क तैयार है और न ही सेनिटाइजर की व्यवस्था। केवल मास्क के दम पर कोरोना से लड़ा जा रहा है। यह हाल तब है, …
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना महामारी के बीच जो भारत सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी, जिला नेत्र चिकित्सालय उसका कतई पालन नहीं कर रहा है। इस अस्पताल में न ही हेल्प डेस्क तैयार है और न ही सेनिटाइजर की व्यवस्था। केवल मास्क के दम पर कोरोना से लड़ा जा रहा है। यह हाल तब है, जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस अस्पताल की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। उसके बावजूद इस तरह की लापरवाही सामने आई है।
कोरोनाकाल में संक्रमण से मरीजों को जागरूक करने, उन्हें सचेत करने। वायरस से सुरक्षित किए जाने के लिए हर निजी व सरकारी अस्पतालों में हेल्प डेस्क तैयार करने को कहा गया था। सरकारी अस्पतालों में भी हेल्प डेस्क तैयार की गई। निजी अस्पतालों में जहां, यह नहीं मिली, उनपर कार्रवाई की गई। पर इस जिला नेत्र चिकित्सालय में इस तरह की कोई कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं की गई।
नतीजा यह रहा कि अस्पताल में कोरोना नियमों का उल्लंघन किया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस अस्पताल में आंखों की जांच कराने जो मरीज पहुंचते हैं, उन्हें नेत्र जांच की तीन डिजिटल मशीनों में आंख की जांच करानी होती है। पर इन मशीनों को न ही बार-बार सेनिटाइज किया जा रहा है और न ही संक्रमण बचाव के जरूरी काम नजर आ रहे हैं।
सरकारी अस्पताल में सेवा शुल्क अधिक
जिला नेत्र चिकित्सालय में सरकारी सेवा जानकर पहुंच रहे मरीजों को बड़ा भारी पड़ रहा है। उनकी जेब ढीली हो रही है। दो साल से इस अस्पताल को जिला आई रिलीफ सोसायटी अस्पताल की व्यवस्था देख रही है। एसीएमओ डा. जीएस मर्तोलिया ने बताया कि अस्पताल के खर्च का जिम्मा इसी संस्था का है। ऐसे में वह निजी तौर पर इसे चलाने के लिए स्वतंत्र है। फिर भी ज्यादा शुल्क न वसूला जाए, इसके लिए नजर रखी जाती है। पहले सीतापुर नेत्र चिकित्सालय ट्रस्ट के माध्यम से अस्पताल चलते थे, पर अब यह व्यवस्था मुरादाबाद सहित कई जिलों में बंद हो गई है।
आंख को संक्रमण का रहता है खतरा
जिला अस्पताल के नेत्र चिकित्सक डा. अंसारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण नाक, मुंह के अलावा आंख से भी फैलने का खतरा रहता है, बल्कि आंख से यदि कोरोना संक्रमण फैलता है तो यह और भी ज्यादा खतरनाक होता है। सावधानी बेहद जरूरी है, साथ ही आंख की जांच कराने जब अस्पताल जाएं तो जिस मशीन का प्रयोग किया जा रहा है, उसका सेनेटाइज किया जाना जरूरी है।
डा. मिलिंद चंद गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
जिला नेत्र चिकित्सालय में हेल्प डेस्क नहीं होने की जानकारी नहीं मिली थी। इस तरह की लापरवाही है तो इसके लिए नोटिस जारी किया जाएगा। इसकी जांच के लिए एसीएमओ को निरीक्षण के लिए भेजा जाएगा। निरीक्षण में कमी नजर आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
