Uttrakhand: काश! कुमाऊं आकर भी कैमरा क्लिक करते रघु, नई पीढ़ी के लिए थे मार्गदर्शक 

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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नैनीताल, अमृत विचार। प्रख्यात फोटोग्राफर रघु राय के निधन पर नैनीताल के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों व छायाकारों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इनका कहना है कि काश कुमाऊं आकर भी कैमरा क्लिक करते रघु राय।

रघु राय को याद करते हुए नैनीताल के फोटोग्राफर अनूप शाह (पद्मश्री) कहते हैं कि, एक छोटी सी मुलाकात के बाद कई बार फोटो प्रदर्शनी के दौरान और कई सम्मेलनों में उनसे मुलाकात होती रही। इस दौरान रघु उनसे उत्तराखंड के बारे में कई बार जानकारियां लेते और कई बार कुमाऊं आने की इच्छा भी जताते थे।

अनूप ने बताया कि उनकी कुमाऊं आने की इच्छा अधूरी रह गई और रविवार सुबह उनके निधन की खबर आई। रघु राय के निधन से फोटोग्राफी जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके कार्य आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करते रहेंगे।

अनूप शाह ने भी रघु राय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रघु राय और उनके भाई एस. पॉल दोनों ही उत्कृष्ट फोटोग्राफर थे। उन्होंने बताया कि दिल्ली की फोटो प्रदर्शनियों में कई बार उनसे मुलाकात हुई और उन्हें नैनीताल आने का निमंत्रण भी दिया गया, लेकिन उनका यहां आना नहीं हो सका।

अनूप शाह के अनुसार रघु राय विशेष रूप से काशी, इलाहाबाद (प्रयागराज), बनारस, हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों के घाटों की फोटोग्राफी के लिए जाने जाते थे। उनकी तस्वीरों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और जीवन के विविध रंगों की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी।

लंबे समय से फोटोग्राफी के क्षेत्र में सक्रिय और पुरस्कार विजेता फोटोग्राफर अहद तनवीर ने बताया कि उनकी मुलाकात दिल्ली में एक फोटो प्रदर्शनी के दौरान रघु राय से हुई थी। उन्होंने कहा कि रघु राय विश्व स्तरीय फोटोग्राफर थे और उनसे उन्होंने फोटोग्राफी की कई बारीकियां और तकनीकी पहलू सीखे। उस दौर में, जब कैमरे और तकनीकी जानकारी सीमित थी, रघु राय जैसे लोग नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बने।

लंबे समय से फोटोग्राफी के क्षेत्र में सक्रिय और पुरस्कार विजेता फोटोग्राफर अहद तनवीर ने बताया कि उनकी मुलाकात दिल्ली में एक फोटो प्रदर्शनी के दौरान रघु राय से हुई थी। उन्होंने कहा कि रघु राय विश्व स्तरीय फोटोग्राफर थे और उनसे उन्होंने फोटोग्राफी की कई बारीकियां और तकनीकी पहलू सीखे। उस दौर में, जब कैमरे और तकनीकी जानकारी सीमित थी, रघु राय जैसे लोग नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बने।

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