कानपुर : जनगणना में जिम्मेदारी का इम्तिहान, दिव्यांग कार्मिकों ने दिखाई राह

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर। कानपुर में जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच जिलाधिकारी के समक्ष रोजाना दर्जनों प्रकरण पहुंच रहे हैं, जिनमें कार्मिक अलग-अलग बहानों से ड्यूटी कटवाने की जुगत में लगे हैं। इसी माहौल में कुछ उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं, जिन्होंने कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना की अलग मिसाल पेश की है। पं. जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज, जामू में तैनात सहायक अध्यापक विजय बहादुर 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं और एक पैर में पोलियो से प्रभावित हैं।

जनगणना में उनकी ड्यूटी जोन-1 के प्रगणक के रूप में लगाई गई है। नियमों के अनुसार वे छूट के पात्र हैं और उन्होंने औपचारिक रूप से आवेदन भी दिया, लेकिन उनका दृष्टिकोण अन्य आवेदनों से अलग है। वर्ष 2011 की जनगणना में भी अपनी भूमिका निभा चुके विजय बहादुर इस बार भी इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तत्पर हैं। 

उनका मानना है कि जनगणना देश की योजनाओं की आधारशिला है और इसमें हर कार्मिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने अन्य कार्मिकों से भी आह्वान किया है कि वे बहानों से ऊपर उठकर इस राष्ट्रीय कार्य में योगदान दें। ऐसे समय में जब ड्यूटी से बचने के आवेदन बढ़ रहे हैं, उनका यह रुख बहानों के बीच एक सीधा जवाब बनकर उभरा है। इसी क्रम में हरजिंदर नगर इंटर कॉलेज में तैनात सहायक अध्यापक जयप्रकाश शर्मा का जज्बा भी उल्लेखनीय है। 

कृत्रिम पैर होने के बावजूद उन्होंने जनगणना के दायित्व को प्राथमिकता दी और स्पष्ट किया कि शारीरिक सीमाएं कर्तव्य निर्वहन में बाधा नहीं बननी चाहिए। प्राथमिक विद्यालय सदिकामऊ, शिवराजपुर में कार्यरत शिक्षा मित्र मधु सिंह का प्रकरण भी उल्लेखनीय है। दाहिने पैर से दिव्यांग मधु सिंह ने ड्यूटी हटाने के बजाय उसे सुगम बनाने का विकल्प चुना और निवास के निकटवर्ती क्षेत्र में ड्यूटी लगाए जाने का अनुरोध किया। 

जिलाधिकारी ने इसे सहर्ष स्वीकार करते हुए उनकी ड्यूटी को जोन-1 से हटाकर उनके घर के पास निर्धारित कर दिया, जिससे वे बिना अतिरिक्त कठिनाई के अपनी जिम्मेदारी निभा सकें। रोजाना आ रहे इन प्रकरणों के बीच ये उदाहरण एक स्पष्ट संदेश देते हैं कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, कर्तव्य से पीछे हटना समाधान नहीं है। फर्क बस इतना है कि कुछ लोग कारण ढूंढ रहे हैं और कुछ लोग जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आ रहे हैं। 

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने ऐसे कार्मिकों के जज्बे को प्रेरक बताते हुए कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में इनकी प्रतिबद्धता अन्य लोगों के लिए उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि जहां आवश्यक हो, वहां मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्मिकों को सहयोग दिया जाए, लेकिन जिम्मेदारी निभाने की भावना ही व्यवस्था को मजबूत बनाती है।  

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