Bareilly : विश्वविद्यालयों का काम केवल शिक्षा देना नहीं, समाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं का समाधान तलाशना भी है -राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में गुजरात दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचीं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, विशेष छात्रों ने प्रस्तुत किए मनमोहक कार्यक्रम एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में गुजरात दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचीं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, विशेष छात्रों ने प्रस्तुत किए मनमोहक कार्यक्रम
बरेली, अमृत विचार। यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बड़े विश्वविद्यालय बनाना आसान है, लेकिन बच्चों की उंगली पकड़कर दिशा देना, हुनर सिखाना और आत्मनिर्भर बनाना कठिन है। संवेदनशील लोग ही ऐसा कर सकते हैं। विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देनाभर नहीं है, बल्कि समाज के बीच जाकर महिलाओं, बच्चों और किसानों की समस्याएं सुनकर, उनका समाधान तलाशना है। हर यूनिवर्सिटी को कम से कम 5 गांव गोद लेकर उनको हर पैमाने पर विकसित करना चाहिए। टीबी मुक्त भारत का आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक 4 लाख से ज्यादा मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।
राज्यपाल (कुलाधिपति) आनंदीबेन पटेल गुरुवार को महात्मा ज्योतिबाफुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहुंचीं थीं। गुजरात दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रोफेसर और छात्रों को ये संदेश दिया। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा संचालित दिशा इंटर कॉलेज, जहां विशेष बच्चों को शिक्षा दी जा रही है-उसकी व्यवस्था की सराहना की। सामान्य छात्रों के साथ विशेष बच्चों ने गीत-संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी।

कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने कुलाधिपति का स्वागत किया। दिशा विद्यालय, जोकि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित है-उसके जरिये विशेष बच्चों के संरक्षण का संकल्प दोहराते हुए कहा कि कौशल विकास के जरिये उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास जारी रहेगा। दरअसल, राज्यपाल ने ही दिशा विद्यालय में केजी से लेकर पीजी तक शिक्षा की व्यवस्था का संदेश दिया था। इसी क्रम में विश्वविद्यालय प्रयासरत है। कुलाधिपति ने अपने संबोधन में कहा कि एक मई 1960 को गुजरात प्रदेश के गठन हुआ था। विश्वविद्यालयों को हर राज्य के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम करने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को राज्यों की विविध जानकारियां होती हैं।

गुजरात का जिक्र करते हुए आनंदीबेन पटेल ने कहा कि, मेरे द्वारा ग्रामीण महिलाओं को प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर जाकर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने का बीड़ा उठाया गया था और लगभग 1.50 करोड़ महिलाओं ने स्क्रीनिंग करवाई थी। इस जांच अभियान में 2000 महिलाओं में कैंसर की संभावना पाई गई थी। समय पर इलाज मिलने पर वे स्वस्थ हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 से 14 साल की बच्चियों को मुफ्त वैक्सीन लगवाने और दवा के लिए आह्वान किया था। जब सरकार मदद करती है तो सबको वैक्सीन लगवानी चाहिए।

यूपी में 3 लाख से ज्यादा बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है। ये वैक्सीन महिलाओं में कैंसर से लड़ने की ताकत प्रदानन करती है। उन्होंने गुजरात का जिक्र करते हुए कहा कि 1998 में जब वह शिक्षामंत्री हुआ करती थीं, तो गांव के स्कूलों में बालिकाओं का ड्रापआउट रेट बहुत अधिक हुआ करता था, इसलिए क्योंकि विद्यालयों में शौचालय नहीं थे। शौचालयों के निर्माण के बाद ग्रामीण स्कूलों में बालिकाओं का ड्रॉपआउट जीरो हो गया। उन्होंने वहां पर स्कूलों में प्रवेश उत्सव मनाने की जो परंपरा शुरू की थी, वो आज तक जारी है।

विद्यार्थियों को सही दिशा देने का संदेश देते हुए कहा कि आजकल युवक-युवतियां अज्ञानतावश रास्ता भटक जाते हैं। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि उन पर नजर रखें। गलत संगत में न पड़ें, क्योंकि एक छोटी सी गलती जीवन बर्बाद कर सकती है। कुलाधिपति ने फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चर के छात्रों द्वारा आधुनिक कृषि में प्रयोग होने वाले कृषि यंत्रों का अवलोकन किया।
