Bareilly : रुविवि के इंजीनियरिंग छात्र किसानों को सिखाएंगे इफको नैनो तकनीक

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Published By Pradeep Kumar
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व्याख्यान में केमिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को बताई नैनो इफको की गुणवत्ता और तकनीक

आंवला, अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र इफको नैनो तरल उर्वरक की गुणवत्ता और अन्य लाभ को सीखकर किसानों को बताएंगे कि ड्रोन से फसलों पर कैसे नैनो उर्वरक का छिड़काव किया जाएगा। छिड़काव से अधिकतम लाभ कैसे मिल सकेगा। किफायती खेती के गुर सीखकर किसान अपनी उपज और आय को कैसे दोगुना कर सकते हैं इसकी भी जानकारी युवा इंजीनियर किसानों को देंगे। यह जानकारी रुहेलखंड केमिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष एमएस करुना ने दी।

बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय इफको नैनो तरल उर्वरक जागरुकता महाभियान से जुडने बाद युवा इंजीनियर किसानों को नैनो तकनीक से सफल और किफायती खेती कैसे की जा सकती है इसे किसानों को सिखाएंगे।

इसके लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में हुए व्याख्यान में आधुनिक कृषि और तकनीक के संगम की नई दिशा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में युवा इंजीनियरों को इफको के नैनो उर्वरकों की गुणवत्ता और ड्रोन आधारित छिड़काव तकनीक की उपयोगिता से रूबरू कराया गया, जिससे खेती को अधिक किफायती, वैज्ञानिक और परिणामकारी बनाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

व्याख्यान में इफको के विशेषज्ञों ने नैनो उर्वरकों और आधुनिक कृषि तकनीकों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। इफको आंवला इकाई के प्रमुख डॉ. अरविंद ढाका ने बताया कि मिट्टी का स्वास्थ्य और उसमें मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटेशियम फसलों की वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने किसानों को बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण कराने की सलाह दी, ताकि रासायनिक उर्वरकों की खपत कम कर कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो तरल उर्वरकों के छिड़काव के फायदे भी समझाए गए। जनसंपर्क अधिकारी विनीत शुक्ल ने बताया कि इफको द्वारा देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने ड्रोन के जरिए उर्वरक छिड़काव का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।

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