Uttrakhand:जंगल में बुझ सके वन्यजीवों की प्यास, टैंकरों से भरे जा रहे नौले और तालाब
हल्द्वानी, अमृत विचार। मानव वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच लगातार बढ़ रहे तापमान से जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोत नौले, गधेरे, तालाब सूख गए हैं या सूखने की कगार पर हैं। ऐसे में वन्यजीव प्यास बुझाने को जंगलों से बाहर निकलेंगे और टकराव होगा। इसकी रोकथाम के लिए जंगलात ने वाटर टैंकर्स से प्राकृतिक स्रोतों में पानी भर रहा है।
हल्द्वानी वन डिवीजन के अंतर्गत नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य है। वर्ष 2012 में बना और 269 वर्ग किमी में फैले अभ्यारण्य के जंगल नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जिलों तक फैले हुए हैं। इस अभ्यारण्य के जंगलों में नंधौर, सूखी आदि नदियां हैं। इनमें सैकड़ों प्राकृतिक बड़े-छोटे जलस्रोत हैं। गर्मी में ये जल स्रोत सूख जाते हैं। इस बार बारिश की कमी और लगातार तापमान बढ़ने से मई से पूर्व ही जल स्रोत सूखने लगे हैं।
अभ्यारण्य में बाघ, तेंदुए, भालू समेत वन्यजीवों की दर्जनों प्रजातियां हैं। यदि जल स्रोत सूख जाते हैं तो ये वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए जंगलों से बाहर निकल सकते हैं जिससे सीधे तौर पर मानव वन्यजीव टकराव का खतरा बढ़ेगा। जो कि वन्यजीव और मानव दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है। इसकी रोकथाम के लिए वन विभाग ने नंधौर अभ्यारण्य में वाटर होल्स बनाने के साथ ही प्राकृतिक जलस्रोतों में वाटर टैंकर्स से नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है। जब वन्यजीवों को जंगल में ही पानी मिलेगा तो आबादी की ओर रुख नहीं करेंगे और संघर्ष की घटनाएं कम होंगी।
वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल में शिकार होने वाले और शिकार करने वाले शिकारी जानवर होते हैं। अमूमन शिकार होने वाले वन्यजीव जैसे चीतल, सांभर, हिरन वगैरह जलाशयों के पास ही रहते हैं। ऐसे में शिकारी वन्यजीव भी इन जल स्रोतों के पास डेरा डालते हैं क्योंकि उनकी भूख और प्यास शांत हो जाती है। यदि जल स्राेत सूखे होंगे तो शिकार व शिकारी दोनों ही किस्म के वन्यजीवों का संघर्ष बढ़ जाएगा।
डीएफओ हल्द्वानी वन डिवीजन कुंदन कुमार ने बताया कि जंगलों में वन विभाग के बनाए गए और प्राकृतिक जल स्रोतों में वाटर टैंकर्स से पानी भरा जा रहा है। इसके अतिरिक्त वन कर्मियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी बीटों में जल स्रोतों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखें तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल पानी की आपूर्ति करें। इसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
