नैनीताल में दर्दनाक घटना:कार में अधिवक्ता ने खुद को मारी गोली, इलाज में देरी पर उठे सवाल

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
On

नैनीताल। कलेक्ट्रेट पार्किंग क्षेत्र में सोमवार को एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। कार के भीतर अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

घटना का खुलासा तब हुआ जब पार्किंग संचालक सागर आर्य को एक पर्यटक ने कार के अंदर बैठे व्यक्ति के कान से खून बहने की सूचना दी। मौके पर पहुंचकर देखा गया कि अधिवक्ता अचेत अवस्था में थे। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार के भीतर अधिवक्ता का शव बरामद किया।

मौके से एक पिस्टल और कार के डैशबोर्ड में रखा एक सुसाइड नोट भी मिला है नोट में अधिवक्ता ने अपनी गंभीर बीमारी से परेशान होने का जिक्र करते हुए लिखा है कि वह अब “जिंदगी की गाड़ी नहीं खींच पा रहे हैं।” साथ ही उन्होंने कुमाऊं आयुक्त, डीएम और एसएसपी से अपनी पत्नी का ख्याल रखने की अपील की है। 

मामले मे एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी उन्हें दी मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर वैधानिक कार्रवाई की है साथ ही फोरेंसिक टीम से जांच भी कराई गई है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 

इलाज में देरी ने खड़े किए गंभीर सवाल
नैनीताल मे हुई दर्दनाक घटना के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि घटना के बाद करीब तीन घंटे तक न तो अधिवक्ता को अस्पताल पहुंचाया गया और न ही मौके पर डॉक्टरों की टीम को तुरंत बुलाया गया। मृतक की पत्नी मौके पर मौजूद रही और लगातार अपने पति के इलाज की गुहार लगाती रही, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनकी बातों को नजरअंदाज किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामे के बाद ही करीब दोपहर 2 बजे बीडी पांडे अस्पताल से एंबुलेंस मौके पर पहुंची।
जिला अस्पताल के डॉक्टर अनिरुद्ध गंगोला ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना लगभग 1:30 बजे मिली, जिसके बाद वह मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक अधिवक्ता की मौत हो चुकी थी।

जांच के साथ जवाबदेही की मांग
जिला न्यायालय और कलेक्ट्रेट परिसर के पास हुई घटना के बाद अब अधिवक्ताओं में रोष देखने को मिल रहा है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ज्योति प्रकाश ने कहा सुबह करीब 9:30 बजे के बाद घटना हुई पुलिस ने अपना फर्ज निभाते हुए घायल अवस्था में अधिवक्ता को अस्पताल ले जाना चाहिए था मगर उन्होंने अधिवक्ता को अस्पताल ले जाने के बजाय घटनास्थल पर रखा और मृत घोषित कर दिया। जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़े करते हैं क्योंकि किसी को भी मृत घोषित करने का अधिकार डॉक्टर को होता है पुलिस को नहीं।

हाई कोर्ट के अधिवक्ता सुभाष जोशी ने बताया  आज की घटना में पुलिस का उदासीन रवैया देखने को मिला। जिला कोर्ट के अधिवक्ता द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम के बाद पुलिस देरी से पहुंची साथ ही ना तो कोई कोई डॉक्टर की टीम पहुंची ना ही उन्हें कोई प्राथमिक उपचार दिया गया। अस्पताल पहुंचाने के बजाय पुलिस फॉरेंसिक टीम को बुलाकर घटना की जांच करती रही। सुभाष ने कहा जब तक पुलिस जांच कर रही थी हो सकता है अधिवक्ता जीवित होते।

जिला न्यायालय के शासन के शासकीय अधिवक्ता सुशील शर्मा ने बताया नोटरी अधिवक्ता ने आत्मघाती कदम उठाया 11:30 बजे के आसपास घटना की जानकारी मिली। मगर पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई और करीब 2 घंटे से अधिक का समय तक अधिवक्ता घायल अवस्था में अपनी गाड़ी में पड़े रहे संभवत उनकी इसी दौरान मृत्यु हुई है

संबंधित समाचार