यूपी में स्कूलों के आसपास ट्रैफिक अव्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों-स्कूल प्रबंधन की उदासीनता पर जताई नाराजगी

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: स्कूलों के आसपास ट्रैफिक अव्यवस्था के मामले पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नाराजगी जताते हुए, कहा है कि समस्या के समाधान को लेकर न तो पर्याप्त गंभीरता दिखाई गई और न ही पहले दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ। दरअसल राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकार के जिम्मेदार अफसरों व स्कूल प्रबंधनों ने कोर्ट के निर्देश पर हुई, पिछली बैठक को गंभीरता से नहीं लिया। 

उन्होंने कहा कि बैठक में सरकार के सक्षम अधिकारियों ने भाग ही नहीं लिया तथा स्कूलों ने भी वही रवैया अपनाया और उसके ऐसे प्रतिनिधि बैठक में पहुंचे जो निर्णय लेने की स्थिति में ही नहीं थे। इस पर न्यायालय ने ट्रैफिक प्रबंधन के लिए व्यापक दिशानिर्देश तैयार किए जाने का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 मई की तिथि नियत की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता सुदीप कुमार ने बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में अप्रैल 2026 में विभिन्न स्कूलों के साथ बैठक आयोजित की गई थी, ताकि उनकी समस्याएं सुनी जा सकें और ट्रैफिक विभाग के निर्देशों, विशेषकर मार्शलों की तैनाती, पर चर्चा हो सके। 

उन्होंने कोर्ट को सरकारी अफसरों व स्कूल प्रबंधकों के लापरवाहीपूर्ण व्यवहार से अवगत कराया। हालांकि उन्होंने न्यायालय से अगली बैठक के लिए एक और अवसर की मांग की। वहीं सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि राज्य सरकार द्वारा प्रशिक्षित किए गए मार्शलों की ज्यादातर स्कूलों में समुचित तैनाती नहीं की गई है, जिससे ट्रैफिक की स्थिति जस की तस बनी हुई है। न्यायालय ने कहा कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ, जिससे आवश्यक पहल का स्पष्ट अभाव दिख रहा है।

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