पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी, विदेश मंत्रालय ने दिया ताजा अपडेट

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। भारत के 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल गए हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा, "हमने प्रगति देखी है और ईरानी पक्ष के साथ राजनयिक बातचीत और संवाद के बाद अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल चुके हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हए हैं। हम ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शेष जहाज भी होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करके भारत पहुंच सकें।"

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरानी जहाजों और समुद्री पहुंच से जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि अन्य देशों के जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालन के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा, "यदि अन्य देशों के जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चलना चाहते हैं, तो किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन आपके इस विशिष्ट प्रश्न के बारे में कि क्या वे भारतीय जलक्षेत्र में आना चाहते हैं, यह ऐसा विषय है जिसका उत्तर जहाजरानी मंत्रालय या संबंधित तकनीकी अधिकारी दे पाएंगे।" 

गौरतलब है कि ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब ईरान ने उन जहाजों के लिए नियमों का एक नया सेट पेश किया है जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना चाहते हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा और जहाजरानी के लिए एक प्रमुख अवरोधक बिंदु है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने वाला अमेरिकी सैन्य अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा। उन्होंने इसे ईरान के साथ बातचीत में हुई प्रगति और पाकिस्तान के अनुरोध का परिणाम बताया। 

ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "पाकिस्तान एवं अन्य देशों के अनुरोध के साथ ही ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान हमें मिली जबरदस्त सैन्य सफलता और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक पूर्ण तथा अंतिम समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है। हमने आपसी सहमति से यह तय किया है कि नाकेबंदी पूरी तरह से लागू और प्रभावी रहेगी। फिर भी 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' (होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही) को थोड़े समय के लिए रोक दिया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि क्या समझौता अंतिम रूप ले पाता है और उस पर हस्ताक्षर हो पाते हैं या नहीं।" 

ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन (यूकेएमटीओ) संगठन ने कहा कि पिछले 48 घंटों में हुए हमलों की एक श्रृंखला के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरा एक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। संगठन ने बताया कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका की नौसेना इकाइयां होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रही थीं और उसने कल और आज विभिन्न खतरों को नाकाम किया।" इसमें बताया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में 'नौवहन में रुकावट, नाकाबंदी लागू करना, बारूदी सुरंगों की रिपोर्ट और हमलों या गलत अनुमानों का जोखिम' जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। 

ओमान की खाड़ी को भी 'गंभीर' श्रेणी में रखा गया है। यूकेएमटीओ ने कहा कि ऐसा 'ऐतिहासिक प्रोजेक्टाइल/यूएवी हमलों' (बिना पायलट वाले हवाई वाहन या ड्रोन) के कारण हुआ है और इसलिए भी क्योंकि वहां सशस्त्र नौसेना की मौजूदगी बहुत अधिक है।

इस जलडमरूमध्य से होने वाला वाणिज्यिक यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है और 4 मई को यहां से केवल पांच जहाज गुजरे और 3 मई को छह, जबकि इसका ऐतिहासिक दैनिक औसत 138 जहाजों का रहा है। इस क्षेत्र में जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों को देखते हुए परिचालन माहौल अभी भी बहुत अधिक जोखिम भरा बना हुआ है। पिछले 48 घंटों में ईरानी इकाइयों द्वारा जहाजों को आक्रामक तरीके से रोकना और जबरदस्ती कार्रवाई करना जैसी कई घटनाएं सामने आयी हैं।

 

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