UP: उत्तराखंड बॉर्डर पर रोकी गईं महिलाएं, कांग्रेस नेता पुलिस चौकी में नजरबंद

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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पीलीभीत, अमृत विचार। बूंदीभूड़ गांव में शराब की दुकान खोलने के विरोध पर जमा हुए ग्रामीणों और पुलिस प्रशासनिक टीम के बीच हुए बवाल का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। महिलाओं और ग्रामीणों पर आबकारी निरीक्षण की ओर से की गई कार्रवाई के खिलाफ डीएम-एसपी से मुलाकात करने के लिए बसों में भरकर गांव की महिलाओं को जिला मुख्यालय लाया जा रहा था, लेकिन पहले से अलर्ट पुलिस ने उत्तराखंड सीमावर्ती कस्बा मझोला में रोक लिया। 

वहीं, कांग्रेस नेता भी असम चौराहा पर रोक पुलिस चौकी में बैठा लिए गए। हालांकि घायल कुछ महिलाओं को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष चकमा देकर पुलिस लाइन पहुंच गए और सहायक पुलिस अधीक्षक को शिकायत पत्र दिलाते हुए लाठीचार्ज करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। फिलहाल सहायक पुलिस अधीक्षक ने मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दिनभर भारी पुलिस बल कचहरी पहुंचने वाले रास्तों पर मुस्तैद रहा।

बता दें कि करीब दो माह से कलीनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम बूंदीभूड़ गांव में पहली बार आवंटित की गई शराब की दुकानों को लेकर ग्रामीण खासकर महिलाएं विरोध कर रही थी। तीन बार एसडीएम, डीएम से शिकायत भी कर चुकी थी। सात मई को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन और आबकारी की टीम गांव पहुंची और दुकान को खुलवाया जा रहा था। इसी दौरान महिलाओं ने पहुंचकर विरोध कर दिया और बवाल हो गया था। तहसीलदार समेत पांच टीम के पांच घायल हुए, जबकि महिलाओं को भी चोटें आई थी। इस मामले में माधोटांडा थाने में आबकारी निरीक्षक की ओर से 58 लोगों के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमला करने की रिपोर्ट दर्ज है।

 ग्रामीणों की ओर से भी शिकायत पत्र एसपी को भेजा गया था, लेकिन उनकी कार्रवाई अभी नहीं हो सकी है। इधर, कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे को उठाया है। शनिवार को बड़ी संख्या में महिलाएं दो बसों में सवार होकर पीलीभीत डीएम-एसपी से मुलाकात करने के लिए आ रही थी। कांग्रेस के नेताओं की अगुवाई में मुलाकात होनी थी। ऐसे में विरोध प्रदर्शन की सुगबुगाहट को देखते हुए सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए। कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार को असम चौराहा के पास पहुंचते ही सुनगढ़ी पुलिस ने रोक लिया। तीखी बहस हुई और फिर उन्हें असम रोड पुलिस चौकी पर बैठाकर एक तरह से नजरबंद कर लिया गया। वहीं, दो बसों में सवार महिलाओं को उत्तराखंड सीमा से सटे कस्बा मझोला में रोक लिया। 

पहले पुलिस उन्हें वहीं, से वापस करने का प्रयास करती रही, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इसे लेकर विरोध किया तो बाद में उन्हें वही बैठा लिया गया। अधिकारियों से कांग्रेस नेता की बात कराई गई। इसी बीच कचहरी तिराहा समेत कई चौराहों पर पुलिस बल तैनात कर निगरानी बरती जा रही थी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा, जिला महासचिव नरेश शुक्ला की अगुवाई में घटना में चोटिल महिलाओं को साथ कार में बिठाकर पुलिस लाइन पहुंच गए। वहां मौजूद सहायक पुलिस अधीक्षक नताशा गोयल से मुलाकात कर महिलाओं क ओर से तहसीलदार समेत अन्य टीम में शामिल अफसर कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर की मांग को लेकर शिकायत पत्र सौंपा गया। उधर, लंबी वार्ता के बाद कुमुद गंगवार समेत उनके साथ के अन्य कांग्रेस नेता भी पुलिस के साथ मझोला पहुंचे और वहीं, महिलाओं से मुलाकात कराई गई। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। जिस पर बमुश्किल महिलाओं को वापस भेजी जा सकी और पुलिस ने राहत महसूस की। वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर को भी घायल महिलाओं के साथ मुलाकात के दौरान शिकायत पत्र सौंपा। सहायक पुलिस अधीक्षक नताशा गोयल ने बताया कि कुछ महिलाओं ने आकर शिकायत पत्र दिया है। इसे उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाते हुए निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई कराई जाएगी।

अब तो किसी कीमत नहीं खुलने देंगे शराब की दुकान
इस घटना के बाद कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की गई और दूसरा पक्ष भी रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग कर रहा है। मगर, विवाद की मूल जड़ शराब की दुकान को लेकर अभी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। दुकान अभी भी बंद हैं। उनको कहीं और शिफ्ट करने को लेकर चिंतन किए जाने की चचाएं भी तेज हैं। वहीं, पुलिस लाइन पहुंची घायल महिलाओं ने भी अपनी पूर्व की मांग को जारी रखा। उन्होंने कहा कि वह तो सिर्फ शराब की दुकान गांव में न खुलने का विरोध कर रही हैं। आसपास के किसी अन्य गांव में जगह देखकर दुकानें खोल दी जाए, इसका कोई विरोध नहीं होगा। मगर ये भी साफ कहा कि अब इतना सब होने के बाद तो शराब की दुकान गांव में नहीं खुलने दी जाएगी, फिर चाहे संघर्ष में जान चली जाए या जेल जाना पड़े।

तहसीलदार ने पहले चलाई लाठी उसके बाद हुआ बवाल
पुलिस एफआईआर दर्ज कर विवेचना कर रही है। तनाव को देखते हुए अभी गिरफ्तारी को लेकर प्रयास नहीं किए गए हैं। वहीं, माहौल अचानक कैसे उपद्रव में तब्दील हो गया। इसे लेकर भी जांच चल रही है। ग्रामीण महिलाओं की मानें तो वह तो सिर्फ शराब की दुकान का विरोध कर रही थी। लाठी चार्ज में घायल कक्षा दस की छात्रा शीतल का आरोप है कि शराब की दुकान खुलने के बाद उसी के भीतर लोग जाम छलका रहे थे। उसको भी तहसीलदार ने ही सबसे पहले डंडा मारा, जिसके बाद बवाल की शुरुआत हुई। आरोप लगाया कि तीन लोगों ने उसे दुकान के भीतर पीटा और बाहर फेंका। इसके बाद अन्य महिलाओं पर लाठी भांजी गई, तब जाकर माहौल पूरी तरह से बिगड़ गया था। उनका कहना है कि महिलाओं ने शराब की बोतलें जरूर फेंकी लेकिन किसी अफसर कर्मचारी से मारपीट नहीं की थी।

सोमवार को एसपी से मिलेंगी महिलाएं और कांग्रेस नेता
कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने घटना के लेकर भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ नशा छुड़वाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और दुसरी तरफ जो नब्बे प्रतिशत की गांव की आबादी शराब की दुकान का विरोध कर रही है, उसके बावजूद पुलिस बल ले जाकर जबरन दुकान खुलवाने की कोशिश की जा रही है। महिलाओं ने विरोध किया तो उन पर लाठी चला दी गई। सवाल उठाया कि तहसीलदार एक जिम्मेदार पद रहते हुए क्यों सबसे पहले महिलाओं पर लाठी चलाने उतर गए, जबकि वहां पर महिला पुलिस भी मौजूद थी। अधिकारियों से वार्ता के बाद उन्होंने मझोला में रोकी गई महिलाओं से मुलाकात की और साफ कहा कि सोमवार को गांव की 11 महिलाओं का प्रतिनिधि मंडल आए। उनके साथ एसपी से मुलाकात कर अपनी बात रखे। अगर फिर भी न्याय न मिला तो अनशन भी किया जाएगा। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।

पट्टे की जमीन पर बनाई दुकान, उसे भी किराए पर दे दिया
कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा का कहना है कि ग्रामीणों को भी चोट आई है। उनका भी मुदकमा दर्ज किया जाए। कहा कि जिस जगह पर दुकान बनी है, वह एक ग्रामीण को पट्टे पर दी गई थी। उस पर खेती करनी चाहिए थी, लेकिन उस पर दुकानें बनाई गई। उसके बाद पट्टे की जगह पर बनाई गई दुकानों को शराब के ठेकेदारों को लीज पर दे दिया गया, जोकि नियमानुसार गलत है। मगर, इन सब बातों पर प्रशासन जांच ही नहीं कराना चाहता है। उन्होंने तहसीलदार की भूमिका पर भी संदेह जताते हुए जांच कराकर कार्रवाईकी मांग की है। उन्होंने ये भी कहा कि जिला मुख्यालय आने के लिए निकली महिलाओं को बार्डर पर रोक लिया गया और हमारे संगठन के नेता नजरबंद कर लिए गए। ऐसा पहले से ही आभास था, इसलिए कुछ घायल महिलाओं को अगल रखा गया था, जिनको सहायक पुलिस अधीक्षक से मिलवाया है। निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिला है।

भाकपा माले नेताओं ने भी तीन सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
घटना के बाद भाकपा माले के नेताओं ने बूंदीभूड़ गांव पहुंचकर शुक्रवार को ग्रामीणों से मुलाकात की थी। जिसके बाद शनिवार को डीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इसमें महज शराब की दुकान का विरोध करने पर महिलाओं पर लाठीचार्ज करने की निंदा की गई। मांग की गई कि बूंदीभूड़ गांव में शराब की दुकान का आवंटन निरस्त किया जाए। महिलआों व अन्य ग्रामीणों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाए। लाठीचार्ज करने वाले पुलिस प्रशासन के जिम्मेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई हो। इस मौके पर जिला प्रभारी अफरोज आलम, किशनलाल, शम्स विकास आदि थे। सभी ने मंझोला पहुंचकर भी गांव की महिलाओं से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

 

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