Bareilly:धर्मस्थलों ने रोकी बरेली-मथुरा फोरलेन की रफ्तार, अटका काम और उलझा NHAI

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। विकास और विस्तार की राह में धर्म के अवरोध खड़े होने से बरेली-मथुरा फोरलेन प्रोजेक्ट जगह-जगह अटका नजर आ रहा है। नाथनगरी से बिनावर तक एनएचएआई को आठ प्वाइंट पर चौड़ीकरण का काम इसलिए रुकवाना पड़ा है, क्योंकि राह में धर्मस्थल आ रहे हैं और लाख कोशिश के बाद भी शिफ्टिंग नहीं हो पा रही है। गंगा एक्सप्रेस वे से कनेक्टिविटी बरेली की कनेक्टिविटी का यही एक रास्ता है और इसकी हालत चौड़ीकरण की वजह से बहुत खराब है। विवाद और विराेध की शंका-आशंकाओं के बीच संवेदनशील धार्मिक स्थान कब शिफ्ट होंगे और कब चौड़ीकरण प्रोजेक्ट रफ्तार पकड़ेगा, इसका जवाब किसी के पास नही है।

बरेली से बिनावार मार्ग पर मकरंदपुर, चाढ़पुर, सिरोही और रसूलपुर जैसे इलाकों में ये धार्मिक स्थल सीधे तौर पर चौड़ीकरण की जद में हैं। इनके आड़े आने की वजह से मुख्य सड़क का निर्माण रुक गया है, जबकि अन्य हिस्सों पर काम धीमे ही सही मगर चल जरूर रहा है। निर्माण एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि जब तक रास्ते में आ रहे धर्मस्थलों का समाधान नहीं होता, तब तक फोरलेन चौड़ीकरण का लक्ष्य पूरा करना संभव नहीं है। धर्मस्थलों का मामला जनभावनाओं से जुड़ा है, इसलिए एनएचएआई फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। बीच सड़क पर खड़े ये ढांचे न केवल निर्माण में बाधक हैं, बल्कि वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का सबब भी बन सकते हैं।

इन अवरोधों के कारण निर्माण की समय सीमा और लागत दोनों बढ़ने की आशंका गहरा गई है। हालात देखते हुए बिल्कुल नहीं लग रहा कि बरेली-बदायूं रोड का चौड़ीकरण तय समय 2027 तक पूरा हो सकेगा। इस बारे में एनएचएआई बदायूं डिवीजन के परियोजना निदेशक उत्कर्ष शुक्ला का कहना है कि स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर संवाद चल रहा है। प्राधिकरण इन धार्मिक स्थानों की शिफ्टिंग या अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। प्रयास है कि विकास और जन-आस्था के बीच संतुलन बना रहे। हालांकि, जानकारों का कहना है कि जब तक इन आठ धर्मस्थलों के विस्थापन पर कोई ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक बरेली-बदायूं फोरलेन पर फर्राटा फरते हुए गंगा एक्सप्रेस वे पर जाने की बात भूल ही जाइए।

दर्द अपने-अपने
बरेली से बदायूं जाते समय बीच में रसूलपुर के पास सड़क काफी संकरी है, क्योंकि बीच में धार्मिक स्थल है। रात में वापसी लौटते समय तो यहां का नजारा और भी डरावना होता है। मुझे लगता है कि आस्था का सम्मान करते हुए प्रशासन से वार्ता कर मंदिरों को सड़क किनारे शिफ्ट कर देना चाहिए।- आरिफ मोहम्मद, बदायूं

बिनावर के कुलदीप ने बताया कि बदायूं रोड से निकलना अब किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क चौड़ीकरण करने के लिए जगह-जगह खुदाई हो गई है। कई जगह बीच में मंदिर आने की वजह से काम अटक गया है। प्रशासन को जल्द ही इन धर्मस्थलों के विस्थापन पर कोई फैसला लेना चाहिए ताकि परियोजना पर कोई असर न पड़े। 

 भमोरा के राज वर्मा के मुताबिक हमें तो समय की चिंता है। बरेली से बिनावार जाने में अब दोगुना समय लगता है। कहीं सड़क चौड़ी है तो कहीं एकदम संकरी। इनकी वजह से गाड़ियों का संतुलन बिगड़ता है। अगर काम ऐसे ही कछुआ चाल से चलेगा, तो लागत भी बढ़ेगी और दुर्घटनाएं भी। सरकार को जल्दी फैसला लेकर रास्ता साफ करना चाहिए। 

देवचरा के पप्पू ने बताया कि हमें तो सबसे ज्यादा डर दुर्घटनाओं का लगता है। कहीं सड़क एकदम चौड़ी है और अचानक सामने मंदिर आ जाता है, जिससे रास्ता संकरा हो जाता है। रात के समय ये ब्लैक स्पॉट्स बहुत खतरनाक होते हैं। अगर हाईवे बनाना है, तो रास्ता पूरी तरह साफ होना चाहिए वरना फोरलेन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। 

 

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