मुरादाबाद : रैन बसेरों में बढ़ा कोरोना का खतरा

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मुरादाबाद,अमृत विचार।  कोरोना  महामारी की नई गाइडलाइन के तहत होटल, धर्मशालाओं व रैन बसेरों में बिना थर्मल स्कैनिंग, मास्क, सेनेटाइजर व कोरोना जांच के ठहराने पर रोक है। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से महानगर में बेघर लोगों के रात्रि विश्राम के लिए जगह-जगह बनाए गए रैन बसेरों में जांच तो दूर, बिना थर्मल …

मुरादाबाद,अमृत विचार।  कोरोना  महामारी की नई गाइडलाइन के तहत होटल, धर्मशालाओं व रैन बसेरों में बिना थर्मल स्कैनिंग, मास्क, सेनेटाइजर व कोरोना जांच के ठहराने पर रोक है। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से महानगर में बेघर लोगों के रात्रि विश्राम के लिए जगह-जगह बनाए गए रैन बसेरों में जांच तो दूर, बिना थर्मल स्कैनिंग, मास्क व सेनेटाइजर के ठहराया जा रहा है।

इसके साथ ही अगले दिन रजाई-गद्दों सहित रैन बसेरों को सेनेटाइज तक नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते रात बिताने के बाद लोग रैन बसेरों में कोरोना संक्रमण का गिफ्ट छोड़कर जा रहे हैं। यह लापरवाही तब है जब गोरखपुर, दिल्ली सहित अन्य जिलों के रैन बसेरों में कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं।

महानगर में नगर निगम की ओर से 9 स्थायी के साथ ही 3 अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं, जिनमें से अस्थायी रैन बसेरे अभी तैयार किए जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन के पास नगर निगम का 36 बेड, रामगंगा विहार में 4, ढाका कुंदनपुर में 60 सहित हरथला में 30 बेड के रैन बसेरे हैं। जहां शाम ढलने के साथ ही मजदूर और राहगीर पहुंचने शुरू हो जाते हैं। समय से पहुंचने पर आधार कार्ड दिखाकर प्रवेश दिया जाता है। क्षमता फुल होने के साथ ही रैन बसेरों के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया जाता है।

ऐसे में लोग रात काटने के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। नगर निगम प्रशासन रैन बसेरों का दौरा कर व्यवस्थाओं को बेहतर करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन हकीकत अलग है। कोरोना संक्रमण काल में रैन बसेरों और रजाइयां व गद्दों को सैनेटाइज तक नहीं किया जा रहा है। इससे यहां तैनात स्टाफ भी परेशान है। आलम यह है कि पूरे रैन बसेरों को एक महीने में दो से तीन बार ही सेनेटाइज किया गया है। नगर निगम लोगों के ठहराने के अलावा अन्य स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को सुधारने की ओर भी ध्यान नहीं दे रहा है। इसके साथ ही सेनेटाइजर तक एक बार खत्म होने के बाद दोबारा मुहैया नहीं कराए गए हैं। ऐसे में संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।

बिना आधार नहीं प्रवेश
सभी रैन बसेरों में लोगों को बिना आधार कार्ड के प्रवेश नहीं दिया जा रहा। ऐसे में जिनके पास आधार नहीं है वह लोग खुले आसमां के नीचे सोने को मजबूर हैं। महानगर में नगर निगम की और से 9 स्थाई के साथ ही 3 अस्थायी रैन बसेरे बनाने का दावा किया गया है। लेकिन, रैन बसेरों में बेड की व्यवस्था अधिक न होने के कारण सीमित लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। इसके बाद रैन बसेरे के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं।

ठंड बढ़ी, नहीं तैयार हुए अस्थायी रैन बसेरे
नगर निगम की ओर से मुरादाबाद व पीतलनगरी डिपो सहित रेलवे स्टेशन पर अस्थायी रैन बसेरा बनाने का दावा तो किया गया। लेकिन, अभी तक रैन बसेरे तैयार नहीं किए गए हैं। जबकि ठंड के प्रकोप से हर कोई सुबह से शाम तक ठिठुरने पर मजबूर हो रहा है। यदि समय से रैन बसेरे तैयार न किए जाए तो बाद में इन रैन बसेरों का प्रयोग नाकाफी ही साबित होगा।

रैन बसेरों में व्यवस्था हैं होटल जैसी
नगर निगम की ओर से बनाए गए स्थायी रैन बसेरों में सुविधाएं किसी होटल से कम नहीं है। यहां दीवान बेड, गद्दे, रजाई, हीटर, सीसीटीवी कैमरों के साथ ही खाने की भी सुविधा उपलब्ध है। महिलाओं ओर पुरुषों के लिए अलग-अलग हाल में बेड लगाकर शयन की व्यवस्था की गई है। यदि रैन बसेरों में बेड की संख्या बढ़ाई जाए तो अधिक राहगिर रात बिता सकेंगे।

देर रात तक आते हैं लोग
नाम न छापने की शर्त पर एक रैन बसेरा संचालक ने बताया कि कई बार निगम प्रशासन को सैनेटाइजेशन के लिए कहा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। देर रात कई बुजुर्ग यहां ठहरने के लिए आते हैं। ऐसे में यदि रजाइयां व गद्दे रोजाना सैनेटाइज नहीं होने से संक्रमण का खतरा रहता है। सुबह लोगों के जाने के बाद सभी रजाइयां और गद्दों को एक साथ रखा जा रहा है।

थर्मल स्क्रीनिंग मशीन अब भी नहीं
कोरोना के मद्देनजर कई जगहों पर सामाजिक दूरी की पालना रैन बसेरों में देखने को अब मिल रही है। लेकिन, वर्तमान समय में रैन बसेरों में तापमान जांचने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग मशीन की व्यवस्था तक नहीं की गई है। ऐसे में बिना थर्मल स्कैनिंग के ही राहगिरों को रैन बसेरों में आश्रय दिया जा रहा है।

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