Moradabad: मंडल में 65 हजार से अधिक गोवंशों को मिला सहारा, गोशालाएं भी हुईं आत्मनिर्भर

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। मंडल में निराश्रित गोवंशों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाया गया है। मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक में सामने आया कि मंडल के 218 गो- आश्रय स्थलों में वर्तमान में 65,113 गोवंश संरक्षित हैं।

मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत मंडल की उपलब्धि सराहनीय है। 4125 गोवंशों की सुपुर्दगी के लक्ष्य के सापेक्ष 7703 गोवंश पशुपालकों को सौंपे गए हैं, जो 186.76 प्रतिशत उपलब्धि है। मंडल में अब केवल 684 निराश्रित गोवंश ही शेष बचे हैं। संभल जनपद में सबसे अधिक 27,768 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। वहीं बिजनौर में 14,658, मुरादाबाद में 10,781, अमरोहा में 8,647 और रामपुर में 3,259 गोवंश आश्रय स्थलों में रखे गए हैं। गोवंशों के लिए चारे और भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। मंडल में 4.24 लाख कुंतल से अधिक भूसा संग्रहित किया जा चुका है। साथ ही 372 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर हरा चारा उगाया जा रहा है। नेपियर घास के 6.10 लाख रूट भी वितरित किए गए हैं।
गोशालाएं बनी आत्मनिर्भर, गोबर से हो रही कमाई

गो आश्रय स्थलों को सरकारी अनुदान पर निर्भरता के बजाय आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर है। मुरादाबाद, अमरोहा और रामपुर के कान्हा और वृहद गो संरक्षण केंद्रों में सीबीजी (गोबर गैस प्लांट) संचालित है। रामपुर के गो आश्रय स्थल किरा में गोबर गैस प्लांट से 15 केवी का जनरेटर भी चलाया जा रहा है। गो उत्पाद और गोबर की बिक्री से मंडल में अच्छी आय हो रही है। रामपुर ने गोबर प्रबंधन से सर्वाधिक 6,17,636 रुपये, अमरोहा ने 5,40,600 रुपये और मुरादाबाद ने 82,829 रुपये की आय प्राप्त की है। मुरादाबाद, बिजनौर और सम्भल में गोबर से लकड़ी (गोकास्ट), मूर्तियां, दीये और धूपबत्ती तैयार की जा रही है।

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