BRICS Summit 2026: वैश्विक संकट के बीच भारत का बड़ा संदेश, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा -'एकजुटता जरूरी, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस'

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। भारत ने कहा है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता और कमजोर होती बहुपक्षीय संस्थाएं वैश्विक व्यवस्था को अधिक नाजुक बना रही हैं और ब्रिक्स देशों को स्थिरता तथा वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए एकजुट होकर कदम उठाने चाहिए। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर ने गुरुवार को यहां हुए ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक असुरक्षा और संस्थागत सुधारों पर केंद्रित संबोधन में कहा कि दुनिया अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रही है। 

इसके पीछे सशस्त्र संघर्ष, जलवायु संबंधी आपदाएं और कोविड महामारी के दीर्घकालिक प्रभाव प्रमुख कारण हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि ये संकट अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का ऐसा संगम हैं जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं की क्षमता की परीक्षा ले रहे हैं और जिनका सबसे अधिक असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा विकासशील देशों पर पड़ रहा है। 

उन्होंने कहा , "स्थिरता, सतत विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई और दृढ़ संकल्प आवश्यक हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स देशों को केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि "प्रभावी और समन्वित समाधान" विकसित करने चाहिए। डा जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति ही संघर्षों के समाधान के टिकाऊ उपाय हैं। 

उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि लगातार तनाव समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन रहा है। भारत ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में निर्बाध आवाजाही को वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया। विदेश मंत्री ने गाज़ा संघर्ष को "गंभीर मानवीय संकट" बताते हुए स्थायी संघर्ष विराम, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और दो-राष्ट्र समाधान के आधार पर दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयासों का समर्थन किया। 

उन्होंने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया की स्थितियों पर भी चिंता जताई और कहा कि इन संकटों के समाधान के लिए निरंतर कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय समन्वय आवश्यक हैं। डा जयशंकर ने कहा, "स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती और शांति टुकड़ों में स्थापित नहीं की जा सकती।" साथ ही उन्होंने संघर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन, नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने की अपील की। 

उन्होंने ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव बनाने वाले उपायों की आलोचना की जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप नहीं हैं। भारत ने कहा कि ऐसे कदमों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव विकासशील देशों पर पड़ता है और वे कूटनीति का विकल्प नहीं हो सकते। विदेश मंत्री ने वैश्विक दक्षिण के देशों में बढ़ती असमानताओं और धीमी विकास दर पर भी चिंता जताई गई। 

भारत ने कहा कि कई विकासशील देश बढ़ती आर्थिक असुरक्षा, महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बीच विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अपनी पुरानी नीति दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के किसी भी रूप को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

भारत ने सीमा पार आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन बताते हुए "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक व्यवस्था को तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन इनके साथ विश्वास, पारदर्शिता और समान पहुंच से जुड़े गंभीर प्रश्न भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने डिजिटल विभाजन को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता बताई। 

जलवायु परिवर्तन को एक निर्णायक वैश्विक चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु कार्रवाई के साथ जलवायु न्याय, पर्याप्त वित्तीय सहायता और विकासशील देशों के लिए सुलभ समर्थन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। विदेश मंत्री ने बहुपक्षीय संस्थाओं, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सुधार में लगातार हो रही देरी वैश्विक व्यवस्था की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को कमजोर कर रही है। 

उन्होंने कहा ," हमारे समय का संदेश स्पष्ट है सहयोग आवश्यक है, संवाद अनिवार्य है और सुधार अब और टाले नहीं जा सकते।" उन्होंने कहा कि भारत सभी साझेदार देशों के साथ मिलकर "अधिक स्थिर, न्यायपूर्ण और समावेशी वैश्विक व्यवस्था" के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिन की बैठक यहां भारत की अध्यक्षता में हो रही है और इसमें सभी सदस्य देशोंं के विदेश मंत्री या उनके प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। 

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