Bareilly : संतोष सबके लिए सबक, सांसद-मंत्री बनकर भी नहीं छोड़ी टूव्हीलर की दौड़

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Published By Pradeep Kumar
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भाजपाई बोले-प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री की अपील का दिख रहा असर, सपाई कह रहे-हमने भी नहीं छोड़ा ऑटो-बस का सफर

बरेली, अमृत विचार। दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष होते नजर आ रहे हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘ईंधन बचाओ’ अपील जिले में असर दिखा रही है। प्रमुख भाजपाई चेहरे अब सार्वजनिक परिवहन की सवारी करने के संकल्प उठा रहे हैं तो विपक्षी सपा के नुमाइंदे सरकार हां में हां तो नहीं कर रहे, मगर बस, ऑटो, साइकिल की सवारी कल भी और आज भी करते रहने के किस्से जरूर सुना रहे हैं। सबसे खास संदेश जनता के बीच सुने जा रहे हैं, जिनमें खुले तौर पर मंत्री-सांसद रहते लगातार बाइक-स्कूटी से सड़कों पर दौड़ लगाते दिखते रहे झारखंड राज्यपाल संतोष गंगवार के सबक नए-पुराने नेताओं को याद दिलाए जा रहे हैं।

लीडर-अफसर बनकर सार्वजनिक परिवहन से दूरी का समाज में किसी से छिपा नहीं है। ऐसे चेहरों के बेड़े में एक से बढ़कर एक लग्जरी गाड़ियां नजर आती हैं और हमेशा उनके आगे-पीछे दिखाई देने वाले काफिले भी आम जनता के बीच खूब चर्चांए पाते हैं। दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष के बीच अगर पीएम-सीएम अगर ईंधन बचाओ का संदेश दे रहे हैं तो उसके मायने भी खास माने जा रहे हैं। कहा कुछ भी जाए मगर ये भी कड़वी हकीकत है कि लंबी दूरी की ट्रेन यात्राएं छोड़ दी जाएं तो ऐसे खास लोग आम लोगों के साथ रोडवेज-सिटी बस जैसे दूसरे सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से बचते ही नजर आते हैं।

हालांकि, राज्य राजनीति का बड़ा नाम झारखंड राज्यपाल संतोष गंगवार इस मामले में नजीर माने जाते हैं। रिकॉर्ड 8 बार बरेली लोकसभा सीट से सासंद और केन्द्र में कई बार मंत्री रहते हुए भी वह आम लोगों की तरह बाइक-स्कूटी से अपने क्षेत्र में दौड़ते रहे हैं। राज्यपाल बनने के बाद वीवीआईपी प्रोटोकॉल के चलते अब ऐसा नहीं दिखता मगर इससे पहले की उनकी तस्वीरें दूसरों के लिए किसी सबक कम नहीं मानी जातीं। ऐसे खास लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन के प्रयोग के संदेश को लेकर ‘अमृत विचार’ ने जिले की राजनीति के कुछ प्रमुख चेहरों से उनकी राय जानी तो प्रतिक्रियां भी विशेष सुनने को मिली हैं।

जिलाध्यक्ष बनते ही दौड़-भाग के बाद कार लेने वाले आंवला भाजपा जिलाध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह कहते हैं कि पांच महीने पहले ई-बस से यात्रा की थी। वह पहले से ही बेवजह गाड़ियों का काफिला लेकर चलने के पक्ष में नहीं हैं। शहर से अपने आवास तक कई बार बस से सफर कर चुके हैं। हमारी पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी बाइक से ही चलते हैं। उन्हें यह प्रेरणा वरिष्ठ लीडर संतोष गंगवार और उनकी सादगी से मिली है। कई दशक टू व्हीलर से राजनीति की यात्रा करने वाले भाजपा महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना कहते हैं कि वह वह जल्द ही ईंधन की बचत को लेकर पार्टी स्तर पर रूपरेखा तैयार करेंगे। फिलहाल निजी वाहन से ही आवागमन होता है, लेकिन बाहर जाने पर कोशिश रहेगी कि कई गाड़ियों की बजाय एक ही वाहन से सफर किया जाए।

बहेड़ी से सपा विधायक अताउर रहमान बोले, वह तो पहले से ही साइकिल संस्कृति से जुड़े हैं। शहर में कई बार साइकिल से निकलते हैं। काफी समय से बस में सफर नहीं किया है, लेकिन दिल्ली में निजी कार की बजाय मेट्रो को ही प्राथमिकता देते हैं। सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव ने कहा कि वह अक्सर ऑटो और रोडवेज बसों से ही सफर करते हैं। सुबह के समय साइकिल का भी इस्तेमाल करते हैं। महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी कहते हैं कि दिल्ली आदि जगहों पर कई बार बस से यात्रा करते हैं। शहर में भी कार की बजाय टेंपो से चलना ज्यादा पसंद करते हैं।

नए नेताओं का भी पहला शौक लग्जरी गाड़ी
बरेली। पुराने और प्रमुख चेहरों की चर्चा छोड़ दें तो राजनीति के नवेले चेहरों में भी पहला शौक एक से बढ़कर एक लग्जरी कार से चलने ही देखा जाता है। पिछले समय में जब पंचायत चुनाव जल्द होने की चर्चाएं चल रही थीं तो अकेले बिथरी के भूड इलाके में ही जिला पंचायत सदस्य चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे ज्यादातर युवा चेहरों ने अपनी पुरानी कारों से नाता तोड़कर फार्चुनर व स्कॉपियो जैसी लग्जरी गाड़ियां खरीद डाली थीं। एमपीए, मेयर, एमएलए, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख ही नहीं, मौजूदा वक्त में तो कितने ही ग्राम प्रधान तक हर वक्त महंगी कारों से चलना पसंद करते हैं। चुनावी दौड़ में शामिल युवा चेहरों में अब शायद ही कोई ऑटो या बस चलता हो !

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