कोचिंग सेंटर्स के 'झूठे दावों' पर सरकार का हथौड़ा! कोटा-सीकर के संस्थानों पर लगा भारी जुर्माना... CCPA ने थमाए 60 नोटिस
नई दिल्ली / लखनऊ: NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों के भ्रामक विज्ञापनों और मनमाने दावों पर केंद्र सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल और जमीनी सर्जिकल स्ट्राइक की है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देशव्यापी अभियान चलाकर गुमराह करने वाले विज्ञापनों और अनुचित व्यापार तौर-तरीकों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है।
इस कड़ी कार्रवाई के तहत CCPA ने अब तक विभिन्न कोचिंग सेंटर्स को 60 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं और कुल मिलाकर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना ठोका है। इसी अभियान के अंतर्गत राजस्थान के प्रमुख कोचिंग हब कोटा और सीकर के संस्थानों पर भी 15 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है।
कोटा और सीकर के इन बड़े नामों पर गिरी गाज
CCPA ने छात्रों और अभिभावकों को भ्रम में रखने के आरोप में दो बड़े संस्थानों पर सीधे आर्थिक जुर्माना लगाया है:
मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड (कोटा): भ्रामक प्रचार के दोषी पाए जाने पर इस संस्थान पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
करियर लाइन कोचिंग - CLC (सीकर): नियमों की अनदेखी और गलत दावों के लिए इस कोचिंग सेंटर पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
क्यों हुई यह कार्रवाई? सामने आई कोचिंग सेंटर्स की ये बड़ी चालाकियां
CCPA ने जब अखबारों, ऑफिशियल वेबसाइट्स, यूट्यूब चैनलों और इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर चल रहे विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया, तो जांच में हैरान करने वाले सच सामने आए:
1. कोर्स की जानकारी छिपाना: कोचिंग संस्थान अपनी टेस्ट सीरीज या शॉर्ट-टर्म कोर्स में शामिल होने वाले टॉपर्स की तस्वीरें और नाम बड़े-बड़े विज्ञापनों में चमका रहे थे, लेकिन उन्होंने यह छुपा लिया कि इन छात्रों ने असल में उनके यहाँ कौन सा कोर्स (जैसे- क्रैश कोर्स या सिर्फ मॉक टेस्ट) लिया था। इसे फुल-टाइम क्लासरूम प्रोग्राम की तरह दिखाया गया।
2. रिजल्ट के बाद एडमिशन का खेल: जांच में यह भी पाया गया कि कई छात्र ऐसे थे जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद कोचिंग में औपचारिकताएं पूरी की थीं, लेकिन विज्ञापनों में उनकी सफलता का पूरा श्रेय खुद कोचिंग संस्थान ने लूट लिया।
3. बिना अनुमति तस्वीरों का इस्तेमाल: विज्ञापनों में सफल उम्मीदवारों की तस्वीरों और उपलब्धियों का कमर्शियल इस्तेमाल करने से पहले छात्रों या उनके माता-पिता से कोई लिखित या उचित सहमति (Consent) नहीं ली गई थी।
किस कानून के तहत कसा गया शिकंजा?
यह पूरी कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) के तहत की गई है। CCPA का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं (इस मामले में छात्रों और अभिभावकों) के अधिकारों की रक्षा करना है। कानून के मुताबिक, देश में किसी भी सामान या सेवा को बेचने के लिए झूठा, भ्रामक या आधा-अधूरा सच दिखाने वाला विज्ञापन देना दंडनीय अपराध है। सरकार के इस कड़े रुख से साफ है कि भविष्य में छात्रों के भविष्य और भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले विज्ञापनों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
