यूपी के किसानों को मिलेगा फसल सुरक्षा का कवच, नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस प्रोग्राम के लिए 24.73 करोड़ की वित्तीय मंजूरी
-किसानों को फसल बीमा सुरक्षा देने के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला -वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी हुई धनराशि, कृषि विभाग को सख्त निर्देश
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश सरकार ने किसानों को फसल नुकसान से सुरक्षा देने और कृषि क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत 24.73 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी की है। कृषि अनुभाग-2 की ओर से जारी शासनादेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह धनराशि मंजूर की गई है।
शासनादेश के अनुसार अनुदान संख्या-11 के तहत “नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस प्रोग्राम” मद में कुल 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसके सापेक्ष 24 करोड़ 73 लाख 95 हजार रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह धनराशि किसानों को फसल बीमा योजना के तहत सहायता उपलब्ध कराने और योजना के संचालन पर खर्च की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने कृषि निदेशक को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित मदों में ही किया जाए और भारत सरकार व राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही व्यय सुनिश्चित किया जाए। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में अनधिकृत या अतिरिक्त खर्च नहीं किया जाएगा।
एकमुश्त निकासी पर रोक
सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोषागार से एकमुश्त धनराशि नहीं निकाली जाएगी। आवश्यकता के अनुसार ही राशि आहरित की जाएगी और किसी भी बैंक खाते या डाकघर में धनराशि रखने की अनुमति नहीं होगी। शासन ने खर्च में मितव्ययिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है।
कृषि निदेशक होंगे जवाबदेह
शासनादेश में कहा गया है कि आंकड़ों की शुद्धता और धनराशि के सही उपयोग की जिम्मेदारी कृषि निदेशक की होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन कार्यों के लिए राशि स्वीकृत की गई है, उनके लिए पहले से किसी अन्य स्रोत से धनराशि स्वीकृत न हुई हो और किसी प्रकार की दोहराव स्थिति न बने।
किसानों को मिलेगा सुरक्षा कवच
प्रदेश सरकार का मानना है कि फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल क्षति से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाती है। समय पर वित्तीय स्वीकृति मिलने से योजना का संचालन सुचारु रहेगा और अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सकेगा।
