World Hypertension Day: हाइपरटेंशन इस ‘साइलेंट किलर’ को किया जा सकता है नियंत्रित

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Published By Muskan Dixit
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विवेक शुक्ला, कानपुरः विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में हर तीन में से एक वयस्क उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर) से प्रभावित है। उच्च रक्तचाप का अनियंत्रित रहना कालांतर में दिल का दौरा (हार्ट अटैक), स्ट्रोक, हृदय विफलता (हार्ट फेल्योर), किडनी या गुर्दे की क्षति और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को बुलावा देता है। अनेक मामलों में उच्च रक्तचाप की समस्या का पता ही नहीं चल पाता। इस कारण इस बीमारी को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2026 की थीम है- ‘कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टुगेदर।’ इसका आशय है कि उच्च रक्तचाप को मिलकर नियंत्रित करें। असल में यह थीम उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) को नियंत्रित करने या उसके प्रबंधन में सामुदायिक प्रयास, समुचित जांच और स्वस्थ जीवन शैली पर जोर देती है। यदि किसी व्यक्ति का रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) 140/90 से ऊपर चला जाता है तो उसे सहज मेडिकल भाषा में उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन कहा जाता है।

क्या है हाई ब्लड प्रेशर की समस्या 

हृदय रक्त की पंपिंग करता है। पंपिंग की इस प्रक्रिया के तहत रक्त का धमनियों (आर्टिरीज) की दीवारों में जो प्रवाह होता है, उसे रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) कहते हैं। दिनभर में काम के दबाव या तनाव का समुचित प्रबंधन न कर पाने के कारण या फिर अन्य नकारात्मक या चिंताजनक कारणों के चलते आपका रक्त चाप सामान्य से अधिक बढ़ सकता है या फिर उच्च (हाई) हो सकता है। उस मेडिकल कंडीशन को हम उच्च रक्त चाप (हाई ब्लड प्रेशर) कहते हैं, जिसमें हृदय से शरीर के समस्त भागों को शुद्ध रक्त पहुंचाने वाली धमनियों (आर्टिरीज) में कई कारणों से दबाव बढ़ जाता है। धमनियों में दबाव बढ़ जाने के परिणामस्वरूप हृदय को अपने क्रियाकलाप यानी रक्त को पंप करने में सामान्य स्थिति से परे कहीं अधिक श्रम करना पड़ता है। यह स्थिति दिल की सेहत के लिए अत्यंत नुकसानदेह है।

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सिस्टोलिक व डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर

किसी व्यक्ति के रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) का आकलन दो प्रकार से किया जाता है, जिन्हें सहज भाषा में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। रक्त की पंपिंग करते समय दिल संकुचित होता है, जिसे सिस्टोल कहा जाता है। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर की स्थिति में हृदय को रक्त की पंपिंग करने के लिए अधिक श्रम करना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप धमनियों पर दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति को सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। वहीं दिल की एक धड़कन के बाद दूसरी धड़कन के शुरू होने के पहले धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को डायस्टोलिक  ब्लड प्रेशर कहा जाता है।
 
ब्लड प्रेशर को मिलीमीटर एचजी में मापा जाता है। मिली मीटर एचजी रक्तचाप को मापने की एक यूनिट है। यह यूनिट रक्त पर पड़ने वाले दबाव की उपयुक्त जानकारी देती है। मिसाल के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का रक्त चाप 140/ 90 है, तो इसमें उच्च रीडिंग 140 सिस्टोलिक रक्त चाप और 90 डायस्टोलिक रक्त चाप से संबंधित है।

एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप कितना हो

सामान्य और सहज परिस्थितियों के अंतर्गत एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त चाप की उच्चतम रीडिंग (सिस्टोलिक) आम तौर पर लगभग 120 एमएम एचजी और निचली रीडिंग (डायस्टोलिक ) लगभग 80 एमएम एचजी मानी जाती है। एक बड़ी संख्या में हृदयरोग विशेषज्ञों का मानना है कि रक्तचाप की सिस्टोलिक रीडिंग 110 से 140 के अंदर है, तो यह स्थिति चिंताजनक नहीं है। इसी तरह निचली डायस्टोलिक रीडिंग 70 से 90 के बीच है, तो यह स्थिति लगभग चिंताजनक नहीं है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति के रक्त चाप की उच्चतम रीडिंग अक्सर या लगातार या अनेक बार ब्लड प्रेशर मापक उपकरणों से मापने के बाद 140 के ऊपर हो और निचली रीडिंग अक्सर या लगातार 90 पर या इससे  अधिक हो, तो इस स्थिति को उच्च रक्त चाप या (हाई ब्लड प्रेशर) कहा जाता है। 

क्या हैं उच्च रक्त चाप की स्टेज 

उच्च रक्तचाप की स्थिति को समझने के लिए इसकी  स्टेज को जानना आवश्यक है....
-    उच्च रक्तचाप पूर्व की स्टेज- सिस्टोलिक 120 से 139
-    उच्च रक्तचाप पूर्व की स्टेज-डायस्टोलिक 80 से 89
-    उच्च रक्त चाप स्टेज 1 सिस्टोलिक- 140 से 159 
-    उच्च रक्त चाप  स्टेज 1 डायस्टोलिक 90 से 99 
-    उच्च रक्त चाप स्टेज 2 सिस्टोलिक 160 से अधिक
-    उच्च रक्त चाप स्टेज 2 डायस्टोलिक 100 से अधिक

ऐसे लक्षणों पर हो जाएं सचेत

- उच्च रक्त चाप से पीड़ित व्यक्तियों को आमतौर पर घबराहट महसूस हो सकती है।
- दिल की धड़कन का अनियमित हो जाना।
- सिर में भारीपन या तेज सिरदर्द।
- सीने में भारीपन व दर्द महसूस हो सकता है।
- सांस लेने में असहज महसूस करना।
- कुछ लोगों को उच्च रक्तचाप की स्थिति में आंखों से धुंधला दिखाई पड़ता है।
- पैरों में सुन्नपन की समस्या भी कुछ लोगों को हो सकती है। 
- छोटी-छोटी बातों पर तेज गुस्सा आना।
- कई बार अनेक मामलों में हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण नजर नहीं भी आ सकते हैं। इसलिए उच्च रक्त चाप को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

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हाई ब्लड प्रेशर के कारण

उच्च रक्त चाप के अनेकानेक कारण हैं, लेकिन उन कारणों में कुछ प्रमुख कारण ये हैं....

तनावपूर्ण और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने भी तनावपूर्ण जीवनशैली को उच्च रक्त चाप का एक प्रमुख कारण माना है। सच तो यह है कि आज युवा वर्ग से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग विभिन्न सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और अन्य कारणों से तनावग्रस्त हैं, जो व्यक्ति तनाव को नियंत्रित करने की विधियों पर सफलतापूर्वक अमल नहीं कर पाता, उसके दिमाग पर तनाव हावी हो जाता है, जो कालांतर में उच्च रक्तचाप का कारण बनता है। 

कोरोनरी आर्टरी डिजीज और अन्य समस्याएं

जो लोग विभिन्न प्रकार के हृदय रोगों जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय धमनी रोग) और हार्ट वाल्व से संबंधित समस्याओं आदि से ग्रस्त हैं, उनमें उच्च रक्तचाप की समस्या कई जटिलताएं उत्पन्न कर सकती है। जिन लोगों को अतीत में दिल का दौरा पड़ चुका है, उन्हें हाई ब्लड को नियंत्रित करने के प्रति काफी सचेत रहने की जरूरत है।

शारीरिक श्रम से कतराना और मोटापा

जो लोग शारीरिक श्रम, व्यायाम और खेलों में भाग नहीं लेते, उनमें उच्च रक्तचाप से ग्रस्त होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही जो लोग आलस्यवश किसी भी तरह का व्यायाम नहीं करते और जो अत्यधिक चिकनाई युक्त आहार ग्रहण करते हैं, उनमें मोटापे से ग्रस्त होने की आशंका आम व्यक्तियों की तुलना में दोगुनी होती है। ऐसे व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त हो जाते हैं। मोटापा कालांतर में हाई ब्लड प्रेशर और अन्य हृदय रोगों का कारण बन सकता है।

डायबिटीज की समस्या  

जो लोग डायबिटीज के साथ जिंदगी जी रहे हैं और जिनकी ब्लड शुगर ज्यादातर नियंत्रित नहीं रहती, उनमें हाई ब्लड प्रेशर होने की आशंका आम व्यक्ति की तुलना में कहीं ज्यादा होती है।

किडनी से संबंधित समस्याएं

जो लोग किडनी या गुर्दों से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर जटिलताएं उत्पन्न कर सकता है।

नमकीन खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन

नमकीन व अत्यधिक चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप की समस्या को बढ़ा सकते हैं।

धूम्रपान और शराब का सेवन

किसी भी चीज की अधिकता सेहत के लिए नुकसानदेह होती है। शराब और धूम्रपान के कारण कालांतर में रक्त नलिकाओं को क्षति पहुंचती है। इसलिए धूम्रपान और शराब से परहेज करें।

ऐसे करें उच्च रक्त चाप का प्रबंधन

उच्च रक्तचाप को जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन करके और डॉक्टर द्वारा बताई गईं दवाओं के सेवन से नियंत्रित किया जा सकता है। जीवनशैली के अंतर्गत सकारात्मक सोच और विचार, स्वास्थ्यकर खानपान, व्यायाम और पर्याप्त नींद( लगभग 6 से 8 घंटे की गहरी नींद ) को शामिल किया जाता है।

सकारात्मक सोच का महत्व

तनाव का हृदय की धड़कनों के अनियमित होने से सीधा संबंध है। इसलिए जहां तक हो सके, सकारात्मक सोच के जरिए तनाव का प्रबंधन करें। ऐसा करने से आपके दिमाग में नकारात्मक विचार कम हो जाते हैं और हाई ब्लड प्रेशर और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त होने का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।

वजन पर नियंत्रण

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बढ़े हुए वजन को नियंत्रित कर लिया जाए, तो इससे बढ़े हुए रक्तचाप को कम कर सकते हैं।
उच्च रक्तचाप के नियंत्रण में सहायक पोटेशियम
पोटेशियम एक प्रमुख मिनरल है, जो दिल और किडनी की सेहत के लिए लाभप्रद माना जाता है। शरीर में पोटेशियम की कमी से दिल की धड़कन में अनियमितता और हृदय की कार्यप्रणाली से संबंधित समस्या उत्पन्न हो सकती है। यह मिनरल उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक है। टमाटर, पालक, बींस,आलू, केला, अंगूर और इससे निर्मित ड्राई फ्रूट्स किशमिश और मुनक्का में पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
-डॉ. प्रवीण कहाले, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई

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