Satire: बाइक पर मोबाइल योग! कान-कंधे के बीच फोन दबाकर नया आसन, साइड इफेक्ट की 100% गारंटी
लखनऊः योगगुरु ने कभी ये सोचा भी नहीं की होगा कि जिस आम पब्लिक को खुले वातावरण मे जमीन पर चद्दर बिछाकर और फिर उस पर बैठकर योग करने की सलाह वह दे रहे हैं, एक दिन वही पब्लिक अपने दम पर एक नई योग मुद्रा की खोज कर लेगी और उसे बिल्कुल नए कलेवर में लोगो के समक्ष प्रस्तुत करेगी। पहले इस नव योग से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें समझ लें। इस योग की न्यूनतम अहर्ता ये है कि आपके पास दो पहिया वाहन हो।
दो पहिये से मेरा तात्पर्य समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह से कतई नहीं है, मोटर साइकिल से है। मोटर साइकिल कोई भी हो सकती है- हीरो, होंडा, बजाज, बुलेट से लेकर स्कूटी तक। इस योग में पुरुष और महिलाओं दोनों की बराबर की भागीदारी हो सकती है। योग का ये आसन जमीन से दो तीन फुट ऊपर होता है, जिस पर आसीन हो इसे अंजाम दिया जाता है। इसके लिए कोई निश्चित टाइमिंग भी नहीं होगी। अनुलोम विलोम की तर्ज पर इसे कभी भी किया जा सकता है।
इस योग की शुरुआत तब होती है, जब आप अपनी बाइक पर सवार हो कही जा रहे हों और उसी वक्त आपकी जेब में रखा एंड्राइड फोन बज उठे। अब आपको करना ये होता है कि पहले तो हैंडल से एक हाथ छोड़कर आपको पैंट की किसी जेब से रखा अपना मोबाइल निकालना होता है, फिर दाहिने कंधे को थोड़ा ऊपर उचकाकर और गर्दन को दाई तरह नीचे की ओर लगभग 45 डिग्री पर मोड़ कर कान व कंधे के बीच मोबाइल को फसाना होता है और इस तरह से आप द्वारा जिस योग की शुरुआत होती है, उसे सरल शब्दों में मोबाइल योग कहते है। यदि फोन पर कोई आत्मीय जन हो और वार्ता लंबी करनी हो, तो यही क्रम आप दाएं भाग को आराम देने के उद्देश्य से बाएं कंधे व बाएं कान के बीच मोबाइल दबाकर जितनी बार चाहे दोहरा सकते हैं।
बस एक गौर करने वाली बात ये है कि योग गुरु के प्रचलित योग के सभी आसनों में जहां साइड इफेक्ट की कोई गुंजाइश नहीं है,वहीं इस योग में साइड इफेक्ट का भरपूर खतरा बना रहता है। इसीलिए इसको करने के दौरान आपको कुछ सावधानियां विशेष तौर पर बरतनी होती है-कंधे और कान के बीच की पकड़ जरा भी कमजोर न पड़ने पाए और न ही आपका ध्यान सामने सड़क पर आ रहने वाहनों पर से पल भर के लिए भी हटना चाहिए। क्योंकि इन दोनों परिस्थितियों में आप जरा सा चूके, तो आर्थिक क्षति के साथ साथ शारीरिक क्षति होने की शत प्रतिशत गारंटी है। इस योग के करते समय यदि आपकी मोबाइल क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो दो-चार दिन मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर की दौड़ लगाकर इसे दुरुस्त कराया जा सकता है। परंतु इस योग के दौरान यदि कभी शरीर का कोई अंग-भंग होता है, तो दुबारा आप अपनी बाइक पर बैठकर ये योग करने लायक रहेंगे या फिर नहीं, ये आपके वाहन की गति, सड़क की तत्कालीन स्थिति व जीवन के संचित कर्मों पर निर्भर करेगा।
