सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: चोरी गए भारतीय डेटा को वापस लाने या नष्ट करने का तंत्र बनाए मंत्रालय

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Published By Muskan Dixit
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नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से कहा कि वह भारतीयों के कथित रूप से चोरी किए गए और विदेशी सर्वरों पर संग्रहीत व्यक्तिगत डेटा को वापस पाने या नष्ट करने के लिए एक मजबूत तंत्र का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर अभ्यावेदन के रूप में विचार करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ साइबर सुरक्षा सलाहकार नीतीश कुमार द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। प्रधान न्यायाधीश ने इस आधार पर जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया कि यह सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित है और इसका कानूनी पहलुओं से शायद ही कोई लेना-देना है। पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायतों के साथ सरकार से संपर्क करने के लिए कहा। 

याचिका में अदालत से डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 को लागू करने और डेटा उल्लंघनों से जुड़े ''डिजिटल अरेस्ट'' और जबरन वसूली में वृद्धि को कम करने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में उठाई गई चिंताओं की गंभीरता को स्वीकार करते हुए प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि ये मुद्दे "अत्यधिक तकनीकी" हैं और इसमें इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप के बजाय प्रशासनिक और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है। 

पीठ ने कहा, ''चूंकि यह मामला अत्यंत तकनीकी प्रकृति का है, इसलिए हमें लगता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संपर्क करना ही सबसे प्रभावी उपाय होगा। इस निवेदन को पूरक अभ्यावेदन के रूप में प्रस्तुत किया जाए। वे इस पर विचार करेंगे।'' मामले की पैरवी करने वाले कुमार ने कहा कि कम से कम पांच विदेशी देशों की संस्थाओं द्वारा चुराए गए डेटा का इस्तेमाल भारतीयों के खिलाफ हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि उंगलियों के निशान सहित संवेदनशील जानकारी का उपयोग डिजिटल अरेस्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों में किया जा रहा है। 

पीठ ने कहा, "जब तक प्रत्यर्पण संधि नहीं होती," तब तक आरोपियों को कानून का सामना करने के लिए यहां नहीं लाया जा सकता। याचिकाकर्ता ने कहा, "यदि हम डेटा वापस नहीं ला सकते, तो कम से कम उसका पुनर्गठन करके उसे सुरक्षित तो रख सकते हैं।" याचिका में केंद्र सरकार को विदेशी अधिकार क्षेत्रों से चोरी हुए व्यक्तिगत डेटा को पुनः प्राप्त करने या नष्ट करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिका का निपटारा करते हुए, पीठ ने याचिकाकर्ता को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पूरक अभ्यावेदन के रूप में याचिका प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी।

पीठ ने कहा, ''याचिकाकर्ता ने अभ्यावेदनों के माध्यम से इस मामले को केंद्र के संज्ञान में लाया है कि भविष्य में डेटा की सुरक्षा और दुरुपयोग को रोकने के लिए चोरी किए गए डेटा को नष्ट करने के लिए एक व्यापक तंत्र को कैसे कार्यान्वित किया जा सकता है।'' 

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