पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष बने रथिंद्र बोस, कार्यवाही का होगा सीधा प्रसारण
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाएगा, ताकि आम लोग जान सकें कि सदन के भीतर क्या हो रहा है। विधानसभा अध्यक्ष चुनाव के बाद नवगठित 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा कि यह सदन ''जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने'' में अहम भूमिका निभाएगा और संवैधानिक सिद्धांतों तथा स्थापित नियमों के अनुसार काम करेगा।
उन्होंने कहा, ''हम संविधान को ध्यान में रखकर विधानसभा की कार्यवाही को आगे बढ़ाएंगे।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक रथींद्र बोस पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित हुए। इसके साथ ही वह राज्य के उत्तरी हिस्से से इस पद तक पहुंचने वाले पहले विधायक बन गए। मुख्यमंत्री ने सदन में एक मजबूत विपक्ष की जरूरत पर भी जोर दिया।
भाजपा विधायक रथिंद्र बोस निर्विरोध पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित हुए
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से विधायक रथिंद्र बोस शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित हुए। वह राज्य के उत्तरी भाग से इस पद को संभालने वाले पहले विधायक बन गए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सदन में उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद 'प्रोटेम स्पीकर' (अस्थायी अध्यक्ष) तापस रॉय ने ध्वनि मत कराया। सभी 207 भाजपा विधायकों द्वारा बोस के पक्ष में अपना समर्थन देने के बाद अस्थायी अध्यक्ष ने उन्हें विधानसभा अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित घोषित किया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कूच बिहार दक्षिण से विधायक बोस को नवगठित 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार घोषित किया, जबकि विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 207 विधायकों का बहुमत प्राप्त है, इसलिए बोस का अध्यक्ष बनना महज एक औपचारिकता थी।
तृणमूल कांग्रेस के चुनाव से दूर रहने के फैसले ने उनके निर्विरोध चयन का मार्ग प्रशस्त किया। बोस स्वतंत्रता के बाद के इतिहास में पश्चिम बंगाल विधानसभा में अध्यक्ष पद संभालने वाले उत्तर बंगाल के पहले विधायक बन गए हैं। इस घटनाक्रम को भाजपा सरकार द्वारा उस क्षेत्र के प्रति एक रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है जो पिछले एक दशक में राज्य में भाजपा के सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ में से एक के रूप में उभरा है।
