Art of Living में UP की सांस्कृतिक छटा, साजन मिश्रा ने सुरों से करायी आध्यात्मिक यात्रा
महोत्सव उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत, लोककला, पर्यटन क्षमता और पारंपरिक उद्योगों का उत्सव है, जिसे गुरुदेव की दृष्टि के साथ अत्यंत भव्य और समकालीन अंदाज में सजाया गया है।
अमृत विचार, लखनऊ : आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में पहली बार शुरू हुआ यूपी महोत्सव उत्तर प्रदेश की लोक-संस्कृति, शास्त्रीय संगीत, आध्यात्मिक परंपरा और हस्तशिल्प की रंगीन छटा लेकर आया। यह महोत्सव उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया है और इसमें संगीत, विरासत, पर्यटन तथा पारंपरिक उद्योगों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
महोत्सव के दूसरे दिन पद्मश्री से सम्मानित और बनारस घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक साजन मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की दृष्टि हमेशा बहुत व्यापक रही है और वे संस्कृति को जिस पैमाने पर आगे बढ़ाते हैं, वह पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करता है।
माहौल में आध्यात्मिक भाव के साथ घुली लोकधुन
उधर, पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव की कजरी प्रस्तुति ने भी माहौल को लोकधुनों और आध्यात्मिक भाव से भर दिया। गुरु वंदना, देवी वंदना और कजरी गायन के माध्यम से उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक-परंपरा को बेहद सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत विशेष देवी पूजा से हुई, जिसमें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री के. वेंकट रमण घनपति ने गुरुदेव को सम्मानित किया। आयोजन में आर्ट ऑफ लिविंग के उत्तर प्रदेश चैप्टर के अनेक सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
महोत्सव में 22 मई से 24 मई तक आने वाले आगंतुकों को उत्तर प्रदेश के स्वाद, वस्त्र और शिल्प की झलक भी मिलेगीइन स्टॉल्स में प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट उत्पादों और कारीगरी को प्रदर्शित किया गया है।
हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी
प्रदर्शनी क्षेत्र में हस्तनिर्मित उत्पाद, स्थानीय वस्त्र, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक स्मृतिचिह्न आगंतुकों के लिए एक आकर्षक अनुभव पेश कर रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और प्रयागराज जैसे पवित्र और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों को भी एक immersive अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया है।

यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत, लोककला, पर्यटन क्षमता और पारंपरिक उद्योगों का उत्सव है, जिसे गुरुदेव की दृष्टि के साथ अत्यंत भव्य और समकालीन अंदाज में सजाया गया है।
