Barabanki News : जिला कारागार में खेती से बदल रही कैदियों की जिंदगी, बर्मी कम्पोस्ट से उगा रहे ऑर्गेनिक सब्जियां

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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बाराबंकी, अमृत विचार। जिला कारागार में कैदी अब जुर्म की दुनिया छोड़ खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। जेल परिसर के भीतर ही बंदी बर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) की मदद से मौसमी और ऑर्गेनिक सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

यह पहल न केवल उनकी जीवनशैली में बदलाव ला रही है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है। आज कृषि केवल गांवों और किसानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का जरिया भी बन चुकी है। पेशेवर युवाओं और बेरोजगारों की तरह अब जेल के कैदी भी खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

मौसमी सब्जियों की उन्नत खेती को लेकर बाराबंकी जेल के बंदी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिला कारागार में बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में जेल अधीक्षक कुंदन कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके दिशा-निर्देश पर “निमदस” संस्था के प्रबंध-निदेशक एस.के. वर्मा के सहयोग से कैदियों को किसानों की तरह आधुनिक तकनीकों के माध्यम से विभिन्न प्रकार की सब्जियों की उन्नत खेती कराई जा रही है।

जेल अधीक्षक कुंदन कुमार का कहना है कि यह पहल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ बंदियों के सामाजिक पुनर्वास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है। वहीं जेलर राजेन्द्र सिंह ने बताया कि बंदियों द्वारा लौकी, तरोई, लोबिया, करेला, कद्दू, बैंगन, भिंडी, हरा साग और लाल साग जैसी ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार की गई हैं।

बंदियों को जिला कारागार में सब्जियां उगाने की नई-नई तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। निमदस संस्था द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खेती कराई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जेल से बाहर जाने वाला प्रत्येक बंदी कोई न कोई हुनर सीखकर जाए और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी सके।

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