नेपाल सीमा से बुंदेलखंड तक बनेगा हाईस्पीड रोड नेटवर्क, योगी सरकार ने शुरू की नार्थ-साउथ कॉरिडोर योजना

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Published By Anjali Singh
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-योगी सरकार ने शुरू की नार्थ-साउथ कॉरिडोर योजना, 1531 किमी सड़क नेटवर्क बनेगा -कृषि, पर्यटन और व्यापार को मिलेगी रफ्तार, तराई से बुंदेलखंड तक आसान होगा सफर

लखनऊ, अमृत विचार: योगी सरकार प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई दिशा देने की तैयारी में है। एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के बीच अब प्रदेश में “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए नेपाल सीमा से लेकर बुंदेलखंड होते हुए दक्षिण भारत तक मजबूत सड़क संपर्क विकसित करने की रणनीति बनाई गई है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक, कृषि और पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में इस योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक अधिकांश सड़क नेटवर्क पूर्व-पश्चिम दिशा में विकसित हुआ है, लेकिन संतुलित विकास के लिए उत्तर से दक्षिण दिशा में हाईस्पीड कनेक्टिविटी विकसित करना जरूरी है। प्रस्तावित कॉरिडोर नेपाल सीमा से जुड़े जिलों को प्रयागराज, चित्रकूट और बुंदेलखंड के रास्ते मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से जोड़ेगा।

सरकार ने चार प्रमुख नार्थ-साउथ कॉरिडोर चिह्नित किए हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 1531 किलोमीटर होगी। इनमें 1232.60 किलोमीटर हिस्सा पहले से एक्सप्रेस-वे या राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है, जबकि बाकी हिस्सों का चौड़ीकरण और निर्माण किया जाएगा। पहले कॉरिडोर में कुशीनगर-देवरिया-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को शामिल किया गया है। इसकी 53.25 किलोमीटर लंबाई के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है और करीब 464 करोड़ रुपये की लागत से काम आगे बढ़ रहा है। दूसरे कॉरिडोर में पीपरी (नेपाल बॉर्डर) से बांसी और सिद्धार्थनगर होते हुए प्रयागराज तक सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। तीसरे कॉरिडोर में लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ-नवाबगंज-बांदा मार्ग शामिल है, जबकि चौथा कॉरिडोर मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ेगा।

सरकार का मानना है कि इस परियोजना से तराई, पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होगा। किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी, जबकि धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड को मिलेगा सीधा फायदा

नार्थ-साउथ कॉरिडोर योजना से पूर्वांचल और बुंदेलखंड के कई पिछड़े जिलों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क नेटवर्क से उद्योगों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति मिलेगी। सरकार का दावा है कि इससे निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी

योगी सरकार पहले ही पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर चुकी है। अब नार्थ-साउथ कॉरिडोर के जरिए प्रदेश के दूरस्थ इलाकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी है।

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