बरेली: ऑनलाइन होगा मकानों का ब्योरा, यूआईडी नंबर से होगी पहचान
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम क्षेत्र में आने वाले सभी मकानों का ब्योरा अब ऑनलाइन होगा। हर मकान की पहचान अब 17 अंकों के यूनिक आईडी नंबर से होगी। सितंबर 2021 तक यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शासन की ओर से नियुक्त निजी संस्था ने जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम) …
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम क्षेत्र में आने वाले सभी मकानों का ब्योरा अब ऑनलाइन होगा। हर मकान की पहचान अब 17 अंकों के यूनिक आईडी नंबर से होगी। सितंबर 2021 तक यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शासन की ओर से नियुक्त निजी संस्था ने जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम) सर्वे का कार्य भी शुरू कर दिया है। इस संबंध में संस्था के कर्मचारियों की शनिवार को नगर निगम के सभागार में एक बैठक भी हुई।
नगर निगम क्षेत्र में करीब 1.42 लाख मकान हैं लेकिन टैक्स बेहद कम घरों से मिल रहा है। इसके चलते शासन ने भौगोलिक सर्वे करने का निर्णय लिया है। शासन ने इसकी जिम्मेदारी निजी संस्था को सौंपी है। नगर निगम के अपर आयुक्त अजीत कुमार सिंह के मुताबिक, शासन से नियुक्त निजी संस्था के लोग डोर टु डोर सर्वे करेंगे। साथ ही सेटेलाइट की मदद भी ली जाएगी। शहर के सभी मकानों का डाटा तैयार किया जाएगा।
सर्वे सितम्बर 2021 तक पूरा करना होगा। रोज 750 भवनों का ब्योरा जुटाना होगा। संस्था की ओर से उपलब्ध कराए गए मकानों के डाटा के आधार पर निगम अपनी टीम से क्रास चेकिंग कराएगा। इसके बाद इन मकान मालिकों पर निगम हाउस टैक्स के अलावा अन्य टैक्स भी लगाएगा। इसे लेकर संस्था ने कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण किया। सर्वे कार्य के लिए 40 टीमों को लगाया गया है। इस दौरान सहायक नगर आयुक्त विवेक त्रिपाठी, कर निर्धारण अधिकारी ललतेश सक्सेना, कर निरीक्षक सच्चिदानंद आदि मौजूद रहे।
संपत्तियों की होगी काोडिंग
नगर निगम के क्षेत्र के भवनों का यूनिक प्रापर्टी आईडी का कार्य शुरू कर दिया गया है। आवासीय, गैर आवासीय से लेकर व्यावसायिक संपत्तियों की कोडिंग की जानी है। इसके लिए 17 डिजिट की यूनिक प्रापर्टी आईडी से संपत्ति की पहचान होगी। इससे संपत्तियों की कोडिंग के लिए निर्धारित प्रो-फार्मा तैयार किया गया है। इससे संपत्तियों की पहचान में आसानी होने के साथ ही नामांतरण और बकाया टैक्स वसूली में भी नगर निगम को मदद मिलेगी। भवन स्वामी और संपत्तियों का ब्योरा ऑनलाइन विभागीय वेबसाइट पर देखा जा सकेगा। इसके अलावा यूनिक आईडी को संपत्तियों पर निर्धारित कर प्रणाली से भी जोड़ा जाएगा ताकि उसी से हाउस टैक्स की मौजूदा स्थिति के बारे में भी कर विभाग को जानकारी हो सकेगी।
ऐसे होगी कोडिंग
संपत्तियों का कोड 17 अंकों का होगा। इसमें पहले के दो अंक लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी यानि एलजीडी (राज्य कोड) के होंगे। तीन से पांच अंक तक स्थानीय निकाय का कोड होगा। छह से सात अंकों तक स्थानीय निकाय का जोनल कोड होगा। आठ से दस अंकों तक स्थानीय निकाय का वर्ड कोड और 11 से 16 अंकों तक संपत्ति का कोड होगा। 17वें अंक के स्थान पर एक विशेष अक्षर संपत्ति के प्रारूप को दर्शाएगा जिसमें आर-आवासीय के लिए, एन-गैर आवासीय के लिए और एम-मिश्रित प्रापर्टी (आवासीय व गैर आवासीय) का होगा। इससे पूरा ब्योरा आनलाइन हो जाएगा।
ऐसे होगा सर्वे
सर्वे में संस्था की टीम लोगों के घर जाकर जानकारी लेगी। मकान मालिक का नाम, वार्ड संख्या, कालोनी, मोहल्ले का नाम, मकान में कितने कमरे हैं, मकान का साइज आदि जानकारी जुटाई जाएगी। मालिक का आधार कार्ड आदि कागजात भी लिए जाएंगे। मकान की भौगोलिक लोकेशन भी सेटेलाइट से ली जाएगी और उसका फोटो भी होगा। प्रत्येक मकान का डाटा सॉफ्टवेयर में दर्ज कर नगर निगम को उपलब्ध कराया जाएगा।
