Bareilly : राजकीय पुस्तकालय युवाओं के सपनों को लगा रहा पंख

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
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कई युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर पा चुके नौकरी

बरेली, अमृत विचार। 72 वर्ष पुराना राजकीय जिला पुस्तकालय प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के सपनों को उड़ान दे रहा है। यहां तैयारी कर कई युवा बैंक, पुलिस, बीएसएफ व प्रशासनिक विभागों में चयनित हो चुके हैं। यह पुस्तकालय उन युवाओं के लिए बड़ी उम्मीद साबित हो रहा है, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते।

वर्ष 1954 में इंदिरा मार्केट के पास बना इस पुस्तकालय में करीब 27 हजार किताबों का संग्रह है। इनमें मुंशी प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी ''निराला, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद व अन्य के साहित्य के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें, समाचार पत्र, पत्रिकाओं का विस्तृत संग्रह है। वर्तमान में करीब 850 सदस्य पंजीकृत हैं और लाइब्रेरी में 50 सीटों वाला हॉल है। लाइब्रेरी सुबह 10 से शाम 4 बजे तक खुलती है। छात्रों को वाईफाई की भी सुविधा दी जाती है। छात्रों की डिमांड पर भी किताबें आती हैं। यहां तैयारी करने वाले कई युवा अच्छी नौकरियाें में चयनित हो चुके हैं। ग्रीन वैली निवासी राजुल भारद्वाज वाणिज्य कर अधिकारी पद पर चयनित हो चुके हैं। नंदौसी निवासी भूपेंद्र ने बीएसएफ में सफलता पाई। मढ़ीनाथ निवासी सोनी व दीक्षा सक्सेना का बैंक में चयन हुआ है। इसके अलावा मढ़ीनाथ के ही मुनेश कुमार व श्यामू का चयन पुलिस विभाग में हुआ है। पुस्तकालय में बना हाल छात्र संख्या के लिहाज से छोटा है। ऐसे में छात्रों के लिए नये हॉल का निर्माण कराया जा रहा है। नया हॉल बनने से बैठने के साथ अन्य सुविधाएं भी बेहतर हो जाएंगी।

साहित्य में नहीं रुचि
कभी पुस्तकालय साहित्य पढ़ने वाले लोगों की बैठकी हुआ करता था लेकिन अब साहित्य पढ़ने वालों की संख्या सीमित होती जा रही है। चूंकि मामला भविष्य से जुड़ा है ऐसे में यहां भी बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। उन्हीं की रुचि के अनुसार किताबें, पत्र-पत्रिकाएं मंगाई जाती हैं। बैंकिंग, सेना, सिविल सर्विसेज आदि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी तमाम किताबें यहां हैं। साहित्य पढ़ने के लिए बहुत कम संख्या में लोग आते हैं।

छात्र-छात्राओं को साहित्य से जुड़ी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। हालांकि, ज्यादातर बच्चे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए हैं। नौकरी पाने का उन भारी दबाव होता है। इसी वजह से उनका पूरा ध्यान प्रतियोगी परीक्षाओं पर केंद्रित रहता है। - श्वेता, कनिष्ठ सहायक।

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