निर्भया कांड से भी नहीं सीखा परिवाहन विभाग... सरकारी बसों में महिला सुरक्षा ''राम भरोसे'', 11 हजार बसों से CCTV नदारद
लखनऊ, अमृत विचार: रोडवेज बसों में महिलाओं का सफर करना खतरे से खाली नहीं है। रोडवेज बसों की लगभग साढ़ें ग्यारह हजार बसों में करीब एक तिहाई अधिक महिलाएं रोजाना सफर करती हैं। इनमें से कुछ कामकाजी महिलाएं जैसे अध्यापक, बैंक की कर्मचारी और सरकारी कर्मचारी महिलाएं जो रोजाना सुबह रोडवेज बसों से ऑफिस के लिए निकलती है और फिर देर शाम को इन्ही बसों से वापस अपने घर को लौटती है, इतने बड़ी संख्या में सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा रोडवेज बसों में पूरी तरह से नदारद है। इस बात का खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ जिसमें रोडवेज की लगभग साढ़े हजार बसों में से सिर्फ 134 बसों में सीसीटीवी लगा हुआ मिला हैं।
निर्भया कांड से भी नहीं सीखा परिवाहन विभाग
साल 2012 के दिल्ली निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने बसों में पैनिक बटन और सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए करोड़ों का ''निर्भया फंड'' जारी किया था, लेकिन यूपी परिवहन विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि इतने बड़े हादसे और सख्त निर्देशों के बाद भी महकमे की नींद नहीं टूटी और हादसे के 14 साल बाद भी सरकारी बसों का सुरक्षा की दृष्टि से हाल बेहाल है। जब बसों में कैमरे ही नहीं हैं, तो सफर के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली किसी भी हरकत का कोई सबूत ही दर्ज नहीं हो पाता। इसी बात का फायदा उठाकर अपराधी और मनचले बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम देते हैं।
