सूर्य के आगोश में समा जाएगी एक दिन हमारी धरती
सूर्य की महिमा अपरंपार है, जिसने धरती को सुनहरी किरणों से सींचा, जीवन दिया, हरा-भरा बनाया। मगर एक दिन यही सूरज हमारी धरती को निगल जाएगा। यह ब्रह्मांड का नियम है, जो भी यहां आया है, एक दिन चला जाएगा। ब्रह्मांड के कुदरत का भी यही नियम है। हमारी धरती भी इस नियम से बाहर नहीं, जो अरबों साल बाद सूर्य की लपटों में समा जाएगी।
सूरज हमारे सौर मंडल का मुखिया है, जिसके साथ ग्रहों का जन्म हुआ और उपग्रह, धूमकेतु, क्षुद्र ग्रह और तमाम छोटे बड़े पिंड हैं, जो सूर्य के साथ जन्मे हैं। हमारे सौर मंडल जैसे अनगिनत सौर मंडल ब्रह्मांड में जन्मे हैं, जिनमें न जाने कितने ही खत्म हो चुके हैं।
प्रत्येक सौर मंडल के खात्मे का कारण अंततः उसका मुखिया तारा यानी सूर्य ही बनता है और उसी तरह हमारी धरती के साथ सौर मंडल के सभी ग्रह और पिंड समाप्त हो जाएंगे। सूर्य की ग्रेविटी यानी सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति उन्हें अपने आगोश में समा लेगी। मगर राहत की बात यह है कि, यह समय अभी कुछ समय बाद नहीं बल्कि लंबे समय बाद आएगा।
अनुमान है कि, यह घटना आज से लगभग 5 से 7.5 अरब वर्ष बाद तब होगी, जब सूर्य का फैलना शुरू हो जाएगा यानी उसका आकार बढ़ने लगेगा। उसमें मौजूद हाइड्रोजन गैस खत्म होने लगेगी। हाइड्रोजन ही सूर्य का ईंधन है। सूर्य विशाल आकार लेकर एक दानव का रूप धारण कर लेगा और यही से सूर्य के करीबी दूसरे ग्रहों का अंत भी शुरू हो जाएगा। सबसे पहले बुध ग्रह खत्म होगा, उसके बाद शुक्र ग्रह की बारी आएगी और उसके बाद पृथ्वी का समाप्त होना शुरू हो जाएगा।
सूर्य की महाग्रेविटी में पृथ्वी का समाना शुरू हो जाएगा और एक दिन पृथ्वी पूरी तरह नष्ट होकर सूर्य के आगोश में समा जाएगी। तब सूर्य पूरी तरह एक दानव बन चुका होगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में लाल दानव (रेड जाइंट) नाम दिया गया है।
यह तय है कि सूर्य एक दिन पृथ्वी को निगल जाएगा, लेकिन यह समय आने में लंबा समय लगेगा। हमारे पृथ्वी की उम्र 4.6 अरब साल की हो चुकी है और हमारे सौर मंडल की उम्र करीब 12.5 अरब साल मानी जाती है। यह माना जाता है कि लगभग सात अरब वर्ष बाद सूर्य का लाल दानव बनने की प्रक्रिया शुरू होने लगेगी। दरअसल, सूर्य का जीवन किसी तारे के खत्म होने के बाद शुरू हुआ, जिसकी गैस और धूल से सूर्य बनने की प्रक्रिया शुरू हुई।
इसके केंद्र में गैस और धूल का भंडार जमा हो गया और गर्म होना शुरू हो गया। इस प्रक्रिया में सूर्य के कोर का तापमान इतना ज्यादा बढ़ गया कि उसमें परमाणु संलयन की प्रक्रिया शुरू हो गई और सूर्य पूर्णतः अस्तित्व में आ गया। हाइड्रोजन के साथ हीलियम के कारण चमकना शुरू किया और पूरे सौर मंडल को रोशन करने लगा। सूर्य निर्माण प्रक्रिया में बची धूल से ग्रह बन गए। यह प्रक्रिया गुरुत्वाकर्षण के कारण शुरू हुई। छोटे पत्थर आपस में जुड़कर बड़े पिंड बन गए, जिनमें हमारी पृथ्वी भी शामिल है।
सतत जारी रहेगा ग्रह और तारों के नष्ट होने का सफर
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे कहते हैं कि ग्रह और तारों के नष्ट होने का क्रम सतत जारी रहेगा। यह ब्रह्मांड के कुदरत का नियम है, जो यहां आया है, उसका खत्म होना निश्चित है। कोई जल्दी खत्म हो जाता है तो कुछ अरबों वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। आकाश गंगाओं, ग्रह नक्षत्रों का जीवन अरबों वर्ष चलता है। ग्रहों का जीवन उसका अपना तारा लील जाता है। पृथ्वी का अंत भी सूर्य खत्म कर जाएगा। यह सभी तारों के ग्रहों के साथ होता है।
