‘छिपे रिश्ते’ बन रहे वैवाहिक संबंध टूटने की वजह

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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वैवाहिक रिश्तों में दरार का एक नया कारण तेजी से सामने आ रहा है-वीक सेक्सुअलिटी या समलैंगिकता को छिपाना। परिवार परामर्श केंद्रों, कुटुंब न्यायालय और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दांपत्य जीवन में शारीरिक संतुष्टि की कमी अब रिश्तों के टूटने की बड़ी वजह बनती जा रही है।

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रुचि अवस्थी, स्वतंत्र पत्रकार

 

वैवाहिक रिश्तों में दरार का एक नया कारण तेजी से सामने आ रहा है-वीक सेक्सुअलिटी या समलैंगिकता को छिपाना। परिवार परामर्श केंद्रों, कुटुंब न्यायालय और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दांपत्य जीवन में शारीरिक संतुष्टि की कमी अब रिश्तों के टूटने की बड़ी वजह बनती जा रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई परिवार या दंपति इस विषय पर खुलकर बात नहीं कर पाते, जिससे समस्या और गहरी हो जाती है। शुरुआती दौर में झिझक और संकोच के कारण लोग इसे नजरअंदाज करते हैं, लेकिन समय के साथ यह दूरी मानसिक तनाव, झगड़ों और अंततः अलगाव तक पहुंच जाती है।

परिवार परामर्श केंद्रों में आने वाले मामलों में पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की शिकायतों में वृद्धि देखी गई है। परामर्शदाताओं का कहना है कि पुरुषों में शारीरिक कमजोरी, तनाव, अनियमित जीवनशैली और नशे की आदतें इसके प्रमुख कारण हैं, जबकि महिलाओं में असंतोष और भावनात्मक दूरी इस समस्या को और बढ़ा देती है।
केस हिस्ट्री के तौर पर बरेली का एक मामला भी है।

यहां कपड़ों के एक कारोबारी युवक की शादी लखनऊ की एक युवती से 2024 में हुई थी। शादी के अगले दिन लड़का, वधु से खिंचा-खिंचा सा रहने लगा। बाद में मामला कुटुंब न्यायालय में गया। मालूम हुआ कि लड़का समलैंगिक है। मेडिकल जांच में लड़के में कमी का पता चला और फिर 2025 में शादी शून्य घोषित कर दी गई। सामान्य तौर पर इसे महज एक घटना मानकर खारिज किया जा सकता है, लेकिन लड़की की संवेदनाओं और मानसिक पीड़ा का क्या? उसे किस तरह से जस्टिफाई किया जा सकता है!

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, वीक सेक्सुअलिटी सिर्फ शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका गहरा संबंध मानसिक स्वास्थ्य से भी है। काम का दबाव, चिंता, अवसाद और आपसी संवाद की कमी भी इस स्थिति को जन्म देती है। कई बार दंपति एक-दूसरे को दोष देने लगते हैं, जिससे रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती है। समाज में इस विषय को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। लोग इसे शर्म का विषय मानकर चुप रहते हैं, जबकि यह एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह मजबूत रिश्तों को भी कमजोर कर सकता है।

मनोचिकित्सक इसके कुछ प्रमुख कारण बताते हैं। इनमें तनाव और मानसिक दबाव, काम, आर्थिक जिम्मेदारियों और पारिवारिक दबाव से सेक्स लाइफ प्रभावित होना प्रमुख है। इसके अलावा खराब लाइफस्टाइल, नींद की कमी, अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और व्यायाम की कमी, शराब, तंबाकू आदि का अत्यधिक सेवन, डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा, आपसी संवाद की कमी, यौन शिक्षा की कमी, रिश्ते में प्यार, भरोसा और जुड़ाव कम होने के साथ ही असफल होने का डर समस्या को और बढ़ाता है।

मनोचिकित्सक इसके बारे में कुछ खास उपाय भी बताते हैं। वह कहते हैं कि समस्या के बारे में खुलकर बातचीत करनी चाहिए। पति-पत्नी अपनी भावनाएं और जरूरतें साझा करें। कोई समस्या है तो डॉक्टर या काउंसलर से सलाह लेनी चाहिए। इसके साथ ही नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीक अपनाई जा सकती है। डॉक्टर एक अहम बात यह भी बताते हैं कि रिश्तो में भावनात्मक जुड़ाव जरूरी है। ज्यादा समय साथ बिताना चाहिए। साथ ही यौन स्वास्थ्य से जुड़ी सही और वैज्ञानिक जानकारी भी स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी है। (ये लेखिका के निजी विचार हैं)