आयुष्मान योजना में बड़ी सख्तीः अब 50 बेड और NABH अनिवार्य; सैकड़ों छोटे अस्पतालों पर संकट, दो माह का दिया ultimatum

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों के पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए स्टेट एजेंसी फार काम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) ने गुणवत्ता मानकों को और कड़ा कर दिया है। अब योजना में शामिल होने के लिए निजी अस्पतालों में कम से कम 50 बेड होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही एनएबीएच प्रमाणपत्र भी जरूरी कर दिया गया है। पहले से पंजीकृत अस्पतालों को भी दो माह के भीतर यह प्रमाणपत्र जमा करना होगा, अन्यथा उनका अनुबंध समाप्त कर उन्हें योजना के पैनल से बाहर कर दिया जाएगा।

राजधानी में वर्तमान में करीब 400 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से संबद्ध हैं। इनमें से केवल 50 से 60 अस्पतालों के पास 50 या उससे अधिक बेड हैं, जबकि अधिकांश अस्पताल इस नई शर्त के दायरे में नहीं आते। ऐसे में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम श्रेणी के अस्पतालों के सामने योजना से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।

साचीज के नए प्रावधानों का उद्देश्य आयुष्मान लाभार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। एजेंसी के अनुसार, पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं और मान्यता प्राप्त गुणवत्ता मानकों वाले अस्पतालों को ही योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि मरीजों को इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो।

हालांकि, नए नियमों ने छोटे और मझोले निजी अस्पतालों की चिंता बढ़ा दी है। कई अस्पताल पहले ही पंजीकरण के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन 50 बेड और एनएबीएच प्रमाणन की शर्त पूरी न कर पाने के कारण उनके आवेदन खारिज होने की आशंका है। वहीं, पहले से पैनल में शामिल अस्पतालों के लिए भी दो माह की समयसीमा चुनौती बन गई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस फैसले से जहां गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी, वहीं बड़ी संख्या में छोटे अस्पतालों के बाहर होने से मरीजों के लिए उपलब्ध उपचार केंद्रों की संख्या भी घट सकती है। फिलहाल नए नियमों को लेकर निजी अस्पतालों में हलचल तेज हो गई है और कई अस्पताल प्रबंधन आगे की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

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