भीषण गर्मी में गन्ने की फसल पर मंडराया 'आर्मीवर्म' का संकट, वैज्ञानिकों ने किसानों से किया ये आगाह
शाहजहांपुर, अमृत विचार : यूपी के 47 जिलों की गन्ना फसल पर सैनिक कीट का प्रकोप देखने को मिलने लगा है। अधिक तापमान में पनप रहे सैनिक कीट का असर गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण के दौरान अभी पूर्वी, मध्य और पश्चिम के 12 जिलों में देखने को मिला है। वैज्ञानिकों ने किसानों को आगाह किया है कि सैनिक कीट की रोकथाम के लिए कीटनाशकों का प्रयोग करें।
गन्ना शोध परिषद के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि सैनिक कीट को आर्मीवर्म भी कहते हैं। सैनिक कीट सूड़ी अवस्था में गन्ने की पत्तियों को खाकर हानि पहुंचाती है। मादा सैनिक कीट गन्ने की पत्तियों के पत्र कंचुक में एक समूह में अंडे देती हैं। इन अंड समूहों से 4-5 दिन बाद छोटी-छोटी सूड़ियां निकलकर शाम के समय सैनिकों की भांति समूह में गन्ना फसल की पत्तियों को खाती हैं। सूड़ियों के शरीर के मध्य दोनों ओर लंबाई में चार धारियां पाई जाती हैं। दिन के समय सूड़ियां जमीन के अंदर सूखी पत्तियों, पत्तियों के पत्रकंचुकों एवं गोंफ में छिपी रहती हैं। वर्ष में इसकी दो पीढ़ियां पाई जाती हैं। पेड़ी फसल में इस कीट का प्रकोप अधिक होता है तथा वर्तमान में इस कीट का प्रकोप बढ़ता जा रहा हैं।
गन्ने में सैनिक कीट एक अत्यधिक नुकसानदायक कुतर कर खाने वाला कीट है। यह झुंड में हमला करता है और गन्ने की पत्तियों को तेजी से चट कर जाता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बुरी तरह प्रभावित होते हैं। छोटी सूड़ियां पत्तियों के हरे भाग को खुरचकर खाती हैं, जबकि बड़ी सूडि़यां पत्तियों को किनारों से अंदर की ओर कुतरकर छलनी कर देती हैं। पेड़ी वाली फसल में इनका प्रकोप अधिक देखा जाता है। यह वर्षा ऋतु और नमी वाले मौसम में इनका प्रकोप सितंबर-अक्टूबर के दौरान अधिक होता है।
