World Yogasana Championship 2026 : विश्व योगासन चैंपियनशिप में बरेली के प्रवीण पाठक ने भारत के लिए जीता स्वर्ण पदक
प्रवीण पाठक बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर हैं। पिछली बार एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार विश्व योगासन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर भारत का मान बढ़ाया है।
अमृत विचार : गुजरात के ट्रांसस्टेडिया स्टेडियम में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप (World Yogasana Championship) में मेजबान भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) के रिसर्च स्कॉलर (शोधार्थी) प्रवीण कुमार पाठक ने कलात्मक योगासन के सीनियर पुरुष वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। विश्व योगासन चैंपियनशिप में दुनिया के 75 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।
विश्व योगासन चैंपियनशिप अहमदाबाद में 4 से 8 जून के बीच हुई। भारत ने बेहतरीन मेजबानी की। चैंपियनशिप में अमेरिका, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, नाइजीरिया, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया समेत 75 से ज्यादा देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।
कलात्मक योगासन में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र प्रवीण कुमार पाठक ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। पाठक पिछले वर्ष की एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। उन्होंने शानदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कौन हैं प्रवीण पाठक
विश्व योगासन चैंपियन प्रवीण पाठक ने फिजिकल एजुकेशन में बीएससी किया है। योग साइंस में M.Sc. हैं। अभ रुहेलखंड विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य प्रोफेसर बनना है।
कुलपति ने दी बधाई
प्रवीण पाठक की इस उपलब्धि पर एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने बधाई देते हुए कहा कि "प्रवीण कुमार पाठक की यह जीत केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष का नतीजा नहीं है, बल्कि यह हमारे विश्वविद्यालय की योग एवं खेल संस्कृति का प्रतीक है। हम गर्व से कह सकते हैं कि महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय ने योग के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं।
पीएम-योग गुरु रामदेव के प्रति आभार
विश्व योगासन चैंपियनशिप जीतने वाले प्रवीण पाठक ने कहा कि "यह पदक देश का है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आभारी हूं, जिनके विजन से योग को वैश्विक पहचान मिली। योग गुरु स्वामी रामदेव और सभी पूज्य संतों को नमन, जिन्होंने योग को जन-जन तक पहुंचाया। मैं कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह जी का विशेष रूप से आभारी हूँ, जिन्होंने विश्वविद्यालय में योग वाटिका जैसे अद्भुत प्रयासों से योग को बढ़ावा दिया। ।”
