करनैलगंज सड़क हादसा : जो मदद को दौड़े मौत ने उन्हें ही घेरा, एक हादसे ने उजाड़ दिए कई घर... इलाके में पसरा सन्नाटा

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Published By Deepak Mishra
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जिंदगी भर का जख्म दे गया भलियनपुरवा हादसा

रमेश पांडेय/करनैलगंज/गोंडा, अमृत विचार। बुधवार की रात भलियनपुरवा और आसपास के गांवों में सब कुछ सामान्य था। कहीं बच्चे अपने पिता के घर लौटने का इंतजार कर रहे थे, तो कहीं मां बेटे के लिए खाना परोसने की तैयारी कर रही थी। युवाओं की आंखों में भविष्य के सपने थे और परिवारों के बीच रोजमर्रा की खुशियां बिखरी थीं। लेकिन कुछ ही पलों में एक तेज रफ्तार एक्सयूवी ने कई घरों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।

गुरुवार की सुबह गांवों में चहल-पहल नहीं, बल्कि सन्नाटा पसरा था। हर तरफ चीख-पुकार, आंसू और मातम का माहौल था। जिन घरों में रात तक उम्मीदें थीं, वहां अब सिर्फ यादें और दर्द बचा है। सूर्यवंशन पुरवा निवासी मोहम्मद हसन और मोहम्मद शाकिर उर्फ इम्तियाज की मौत ने उनके परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। सिलाई का काम कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले हसन अपने पीछे पत्नी सकीला, तीन विवाह योग्य बेटियां और दो छोटे बेटे छोड़ गए हैं।

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वहीं दिहाड़ी मजदूरी कर घर चलाने वाले शाकिर की मौत से पत्नी ताजरूनीशा और दो मासूम बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया। इस परिवार का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। कुछ समय पहले कैंसर से बड़े भाई हसन अली की मौत हो चुकी थी और अब तीसरे भाई परवेज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। एक ही परिवार पर लगातार टूट रही विपत्तियों ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।

उधर भलियनपुरवा के गुलशन और उनके भतीजे अंशुमान की कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है। सड़क हादसे की आवाज सुनकर दोनों घायलों की मदद के लिए घर से दौड़े थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मददगार बनकर निकले चाचा-भतीजा खुद मौत का शिकार हो गए।

हाल ही में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा देकर लौटे गुलशन परिवार की उम्मीदों का केंद्र थे। वहीं पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला अंशुमान घर का सबसे दुलारा बच्चा था। गुरुवार को जब दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं और माहौल गमगीन हो उठा। तरहटा गांव में भी दर्द का मंजर कम नहीं था। करनैलगंज तहसील में मुंशी के पद पर तैनात संजय तिवारी देर रात बाइक से घर लौट रहे थे।

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पत्नी पिंकी ने उनके लिए खाना तैयार कर रखा था। आठ वर्षीय वैभव और सात वर्षीय अभय पिता के इंतजार में बार-बार दरवाजे की ओर देख रहे थे। बुजुर्ग माता-पिता की निगाहें भी बेटे के आने की राह पर टिकी थीं,लेकिन घर पहुंचने के बजाय उनके निधन की खबर पहुंची। गुरुवार को जब संजय का शव घर लाया गया तो पत्नी बेसुध हो गईं। जवान बेटे की अर्थी देखकर बुजुर्ग पिता फूट-फूटकर रो पड़े। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।

इन परिवारों की कहानियां भले अलग-अलग हों, लेकिन दर्द एक जैसा है। किसी घर का कमाने वाला चला गया, किसी पत्नी का सुहाग उजड़ गया, किसी मां की गोद सूनी हो गई और कई मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि जो लोग दूसरों की जान बचाने के लिए दौड़े थे वह खुद अपनी जिंदगी हार बैठे।

एक्सयूवी चालक समेत दो गिरफ्तार

अमृत विचार: भलियनपुरवा के पास हुए भीषण सड़क हादसे में शामिल तेज रफ्तार एक्सयूवी कार को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। इस मामले में नगर के सकरौरा निवासी सुयेब तथा सदर बाजार निवासी मोहम्मद सलीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कोतवाली परिसर में खड़ा करा दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार सवार नशे की हालत में वाहन चला रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क पर भारी भीड़ मौजूद होने के बावजूद चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। घटना में कई लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हुए हैं। कोतवाल नरेंद्र प्रताप राय ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। हादसे के संबंध में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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