Kanpur News: बारिश से रुका नमामि गंगे प्रोजेक्ट, गंगा का बढ़ा जलस्तर, 14 नालों की टैपिंग बंद
कानपुर, अमृत विचार। लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से नमामि गंगे परियोजना के तहत चल रहा 14 नालों को टैप करने का काम फिलहाल रोक दिया गया है। जल निगम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए घाटों के आसपास चल रही खुदाई और निर्माण गतिविधियां अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। करीब 150 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य गंगा और पांडु नदी में गिरने वाले दूषित पानी को रोककर उसे सीवरेज सिस्टम से जोड़ना है।
बढ़ते जलस्तर ने रोका घाटों पर काम
इन दिनों लगातार बारिश के चलते गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसका असर घाटों के किनारे चल रहे निर्माण कार्य पर पड़ा है। जल निगम ने बताया कि जिन स्थानों पर नालों को टैप करने के लिए खुदाई की जा रही थी, वहां पानी पहुंचने से काम करना सुरक्षित नहीं रह गया है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने और जलस्तर घटने के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।
150 करोड़ की परियोजना से 14 नाले होंगे टैप
नमामि गंगे परियोजना के तहत जल निगम करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से गंगा और पांडु नदी में गिरने वाले 14 प्रमुख नालों को टैप कर रहा है। परियोजना का लक्ष्य जुलाई 2027 तक पूरा करने का है। योजना के तहत नालों के गंदे पानी को इंटरसेप्ट कर सीवर लाइन और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) तक पहुंचाया जाएगा, ताकि बिना शोधन के कोई भी दूषित पानी सीधे नदी में न गिरे।
रोजाना लाखों लीटर गंदा पानी पहुंचता है नदियों में
जल निगम के अनुसार, वर्तमान में गंगा नदी में 12.29 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) और पांडु नदी में करीब 40 एमएलडी गंदा पानी नालों के जरिए पहुंच रहा है। इस प्रदूषण को रोकने के लिए सभी प्रमुख नालों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इससे गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के अभियान को गति मिलेगी।
दिल्ली की कंपनी कर रही है निर्माण कार्य
जलकल महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी ने बताया कि इस परियोजना का निर्माण कार्य टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड कर रही है। परियोजना के तहत गंगा नदी के रामेश्वर घाट, रानीघाट, गोलाघाट, सत्तीचौरा, मैस्कर घाट, डब्का, मक्कू शहीद का भट्ठा, यूपीए कम्पाउंड और बंगालीघाट के नालों को टैप किया जाएगा। वहीं पांडु नदी में गिरने वाले गंदा नाला, सागरपुरी, अर्रा, टीपी नगर और हलवाखाड़ा नाला भी इस योजना में शामिल हैं।
कहां-कहां बनेंगे पम्पिंग स्टेशन?
परियोजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर नए पम्पिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।
- रानीघाट के पास 6.09 एमएलडी क्षमता का पम्पिंग स्टेशन बनेगा, जिससे पानी जाजमऊ एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा।
- गोलाघाट पर 2.13 एमएलडी क्षमता का पम्पिंग स्टेशन बनाया जाएगा और इसे स्टेटस क्लब के पास पुरानी सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा।
- मैस्कर घाट पर सत्तीचौरा और मैस्कर नालों के लिए 2.93 एमएलडी क्षमता का पम्पिंग स्टेशन बनेगा।
- डब्का नाले के लिए 2.4 एमएलडी के साथ 49.05 एमएलडी क्षमता का बड़ा पम्पिंग स्टेशन तैयार किया जाएगा, जिसे सीधे जाजमऊ एसटीपी से जोड़ा जाएगा।
- मक्कू शहीद का भट्ठा, यूपीए कम्पाउंड और बंगालीघाट के नालों का पानी सीधे सीवर नेटवर्क में डाइवर्ट किया जाएगा।
इन स्थानों पर पानी का प्रवाह कम होने के कारण अलग पम्पिंग स्टेशन की जरूरत नहीं होगी।
मौसम सामान्य होते ही फिर शुरू होगा काम
जल निगम अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के दौरान घाटों पर खुदाई और निर्माण कार्य कराना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फिलहाल काम रोक दिया गया है। जैसे ही मौसम सामान्य होगा और गंगा का जलस्तर कम होगा, परियोजना का निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद गंगा और पांडु नदी में बिना शोधन के गिरने वाले गंदे पानी में कमी आएगी, जिससे नमामि गंगे अभियान को मजबूती मिलेगी और नदी की स्वच्छता में सुधार होने की उम्मीद है।
