UPSRTC News: आउटसोर्स कंडक्टरों का फूटा गुस्सा, समान वेतन से लेकर संविदा नियुक्ति तक 5 बड़ी मांगें

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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UPSRTC मुख्यालय पहुंचे आउटसोर्स परिचालकों ने एमडी को सौंपा पांच सूत्रीय ज्ञापन, आउटसोर्सिंग खत्म करने और गृह जनपद के नजदीक डिपो में तैनाती की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के आउटसोर्स परिचालकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को निगम मुख्यालय में आवाज बुलंद की। परिचालकों ने प्रबंध निदेशक (एमडी) को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने, सीधे निगम के अधीन संविदा पर नियुक्ति देने और समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने की मांग की।

परिचालकों का कहना है कि वे वर्षों से नियमित कर्मचारियों की तरह निगम की बसों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें समान वेतन और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण बिचौलिया एजेंसियों के माध्यम से आर्थिक शोषण हो रहा है। इससे कर्मचारियों के सामने आर्थिक कठिनाइयों के साथसाथ मानसिक तनाव और भविष्य की अनिश्चितता भी बनी हुई है।

कठिन परिस्थितियों में कर रहे बसों का संचालन

ज्ञापन में कहा गया है कि आउटसोर्स परिचालक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के सुचारू और निर्बाध संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी परिचालक पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

परिचालकों के मुताबिक, मौजूदा आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण उन्हें मानदेय में विसंगति, आर्थिक शोषण, मानसिक तनाव और नौकरी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए उन्होंने निगम प्रबंधन से मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने की अपील की है।

आउटसोर्स कंडक्टरों की 5 प्रमुख मांगें

1. आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर सीधे संविदा पर नियुक्ति

परिचालकों ने बिचौलिया एजेंसियों के जरिए होने वाले कथित आर्थिक शोषण को समाप्त करने की मांग की है। इसके लिए सभी आउटसोर्स परिचालकों को सीधे निगम के अधीन संविदा पर समायोजित या नियुक्त करने की मांग रखी गई है।

2. गृह जनपद या नजदीकी डिपो में तैनाती

परिचालकों ने पारिवारिक और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए उन्हें उनके गृह जनपद या निकटतम डिपो में तैनात अथवा स्थानांतरित करने की व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि इससे अतिरिक्त वित्तीय और पारिवारिक बोझ कम होगा।

3. संविदा नीति में समानता और भेदभाव खत्म करने की मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि जब महिला अभ्यर्थियों को सीधे संविदा पर चालक या परिचालक के रूप में अवसर दिया जा रहा है, तो समान योग्यता और कठिन दायित्व निभाने वाले पुरुष आउटसोर्स परिचालकों के साथ विसंगति क्यों रखी जा रही है।

परिचालकों ने मांग की है कि पुरुष परिचालकों को भी समान रूप से संविदा का दर्जा प्रदान किया जाए।

4. समान कार्य के लिए समान वेतन लागू हो

ज्ञापन में कहा गया है कि नियमित और संविदा कर्मचारियों की तरह आउटसोर्स परिचालकों से भी समान कार्य लिया जा रहा है। ऐसे में परिचालकों ने 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत को आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी लागू करने की मांग की है।

उन्होंने इसके लिए माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का हवाला दिया है।

5. समय पर मानदेय और सामाजिक सुरक्षा मिले

आउटसोर्स परिचालकों ने प्रत्येक माह निर्धारित तिथि तक मानदेय का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही ESI, PF और दुर्घटना एवं बीमारी से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

वर्षों से सेवा के बावजूद भविष्य को लेकर चिंता

आउटसोर्स परिचालकों का कहना है कि वे निगम की परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और लगातार कठिन परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद नौकरी की स्थिरता, मानदेय और सामाजिक सुरक्षा को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं।

अब परिचालकों ने निगम प्रबंधन से पांचों मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक और प्राथमिकता के आधार पर विचार कर समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की है।

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